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INDIAN HISTORY, भारत का इतिहास, HISTORY OF INDIA, GK HISTORY

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Indian History Questions & Answers General Knowledge

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Indian History Questions & Answers General Knowledge
Indian History Questions & Answers General Knowledge

भारतीय इतिहास:          भारत के इतिहास को अगर विश्व के इतिहास के महान अध्यायों में से एक कहा जाए तो इसे अतिश्योक्ति नहीं कहा जा सकता। इसका वर्णन करते हुए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने कहा था, ‘‘विरोधाभासों से भरा लेकिन मजबूत अदृश्य धागों से बंधा’’। भारतीय इतिहास की विशेषता है कि वो खुद को तलाशने की सतत् प्रक्रिया में लगा रहता है और लगातार बढ़ता रहता है, इसलिए इसे एक बार में समझने की कोशिश करने वालों को ये मायावी लगता है।

इस अद्भुत उपमहाद्वीप का इतिहास लगभग 75,000 साल पुराना है और इसका प्रमाण होमो सेपियंस की मानव गतिविधि से मिलता है। यह आश्चर्य की बात है कि 5,000 साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता के वासियों ने कृषि और व्यापार पर आधारित एक शहरी संस्कृति विकसित कर ली थी।

युगों के अनुसार भारत का इतिहास इस प्रकार हैः

पूर्व ऐतिहासिक काल -

पाषाण युगः        पाषाण युग 500,000 से 200,000 साल पहले शुरू हुआ था और तमिलनाडु में हाल ही में हुई खोजो में इस क्षेत्र में सबसे पहले मानव की उपस्थिति का पता चलता है। देश के उत्तर पश्चिमी हिस्से से 200,000 साल पहले के मानव द्वारा बनाए हथियार भी खोजे गए हैं।

पाषाण  युग के बारे में 15 महत्वपूर्ण तथ्य | 15 Important Facts about Stone era in Hindi -

स्मरणीय तथ्य -

1- इतिहास के जिस काल की जानकारी के लिए लिखित साधन का अभाव है तथा मानव असभ्य जीवन जी रहा था उसे प्रागैतिहासिक काल कहा जाता है।

2- जिस काल की जानकारी के लिए लिखित साधन तो उपलब्ध हैं परंतु उसे पढ़ा नहीं जा सकता उसे आद्य इतिहास कहा जाता है हडप्पा का इतिहास काल है।

3- इतिहास किए जिस काल की जानकारी के स्रोत के रूप में लिखित साधन उपलब्ध हैं उसे ऐतिहासिक काल कहा जाता है।

4- मानव का अस्तित्व पृथ्वी पर अति नूतन काल के आरंभ में हुआ था।

5- गर्त आवास का साक्ष्य गुफ्फ्कर्ल, बुर्जहोम तथा  नागार्जुनकोंडा से मिला है।

6- बेलन घाटी क्षेत्र पुरापाषाण काल के तीनों चरणों से जुड़ा है।

7- भीमबेटका से गुफा चित्रकारी के साक्ष्य मिले हैं।

8- मध्य प्रदेश के आजमगढ़ तथा राजस्थान के बागोर से पशुपालन के सबसे पुराने साक्ष्य मिले हैं।

9- मेहरगढ़ से सर्व प्रथम कृषि का साक्ष्य मिला है।

10- नव पाषाण युग के हथियार बिहार के चिरांद नामक स्थान से प्राप्त हुए हैं।

11- इलाहाबाद के कोल्डीहवा स्थान से चावल की खेती के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं।

12- गर्तचूल्हे का प्राचीन साक्ष्य लंघनाज तथा सराय नाहर राय से मिला है।

13- कुपगल तथा काडेकल से राख का टीला मिला है।

14- मृदभांड निर्माण का प्राचीनतम साक्ष्य जो चौपानी मांडो से मिला है।

15- मनुष्य के साथ पालतू पशु को दफनाने का साक्ष्य बुर्जहोम से मिला है।

कांस्य युगः          भारतीय उपमहाद्वीप में कांस्य युग की शुरुआत लगभग 3,300 ईसा पूर्व सिंधु घाटी सभ्यता के साथ हुई थी। प्राचीन भारत का एक ऐतिहासिक हिस्सा होने के अलावा यह मेसोपोटामिया और प्राचीन मिस्त्र के साथ साथ विश्व की शुरुआती सभ्यताओं में से एक है। इस युग के लोगों ने धातु विज्ञान और हस्तशिल्प में नई तकनीक विकसित की और तांबा, पीतल, सीसा और टिन का उत्पादन किया।

प्रारंभिक ऐतिहासिक काल -

वैदिक कालः         भारत पर हमला करने वालों में पहले आर्य थे। वे लगभग 1,500 ईसा पूर्व उत्तर से आए थे और अपने साथ मजबूत सांस्कृतिक परंपरा लेकर आए। संस्कृत उनके द्वारा बोली जाने वाली सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक थी और वेदों को लिखने में भी इसका उपयोग हुआ जो कि 12वीं ईसा पूर्व के हंै और प्राचीनतम ग्रंथ माने जाते हैं।

वेदों को मेसोपोटामिया और मिस्त्र ग्रंथों के बाद सबसे पुराना ग्रंथ माना जाता है। उपमहाद्वीप में वैदिक काल लगभग 1,500-500 ईसा पूर्व तक रहा और इसमें ही प्रारंभिक भारतीय समाज में हिंदू धर्म और अन्य सांस्कृतिक आयामों की नींव पड़ी। आर्यों ने पूरे उत्तर भारत में खासतौर पर गंगा के मैदानी इलाकों में वैदिक सभ्यता का प्रसार किया। 

महाजनपदः           इस काल में भारत में सिंधु घाटी सभ्यता के बाद शहरीकरण का दूसरा सबसे बड़ा उदय देखा गया। ‘महा’ शब्द का अर्थ है महान और ‘जनपद’ का अर्थ है किसी जनजाती का आधार। वैदिक युग के अंत में पूरे उपमहाद्वीप में कई छोटे राजवंश और राज्य पनपने लगे थे। इसका वर्णन बौद्ध और जैन साहित्यों में भी है जो कि 1,000 ईसा पूर्व पुराने हैं। 500 ईसा पूर्व तक 16 गणराज्य या कहें कि महाजनपद स्थापित हो चुके थे, जैसे कासी, कोसाला, अंग, मगध, वज्जि या व्रजी, मल्ला, चेडी, वत्स या वम्स, कुरु, पंचाला, मत्स्य, सुरसेना, असाका, अवंति, गंधारा और कंबोजा।

फारसी और यूनानी विजयः         उपमहाद्वीप का ज्यादातर उत्तर पश्चिमी क्षेत्र, जो कि वर्तमान में पाकिस्तान और अफगानिस्तान है, में फारसी आक्मेनीड साम्राज्य के डारियस द ग्रेट के शासन में सी. 520 ईसा पूर्व में आया और करीब दो सदियों तक रहा। 326 ईसा पूर्व में सिकंदर ने एशिया माइनर और आक्मेनीड साम्राज्य पर विजय पाई फिर उसने भारतीय उपमहाद्वीप की उत्तर पश्चिमी सीमा पर पहुंचकर राजा पोरस को हराया और पंजाब के ज्यादातर इलाके पर कब्जा किया।

मौर्य साम्राज्यः        मौर्य वंशजों का मौर्य साम्राज्य 322-185 ईसा पूर्व तक रहा और यह प्राचीन भारत के भौगोलिक रुप से व्यापक एवं राजनीतिक और सैन्य मामले में बहुत शक्तिशाली राज्य था। चन्द्रगुप्त मौर्य ने इसे उपमहाद्वीप में मगध, जो कि आज के समय में बिहार है, में स्थापित किया और महान राजा अशोक के शासन में यह बहुत उन्नत हुआ।

प्राचीन भारतीय इतिहास का घटनाक्रम -

प्रागैतिहासिक काल - 400000 ई.पू.-1000 ई.पू.:      यह वह समय था जब सिर्फ भोजन इकट्ठा करने वाले मानव ने आग और पहिये की खोज की।

सिंधु घाटी सभ्यता - 2500 ई.पू.-1500 ई.पू.:     इसका यह नाम सिंधु नदी से आया और यह कृषि करके उन्नत हुई। यहां के लोग प्राकृतिक संसाधनों की भी पूजा करते थे।

महाकाव्य युग - 1000 ई.पू.-600 ई.पू.:     इस कालखण्ड में वेदों का संकलन हुआ और वर्णों के भेद हुए जैसे आर्य और दास।

हिंदू धर्म और परिवर्तन - 600 ई.पू.-322 ई.पू.:       इस समय में जाति प्रथा बहुत सख्त हो गई थी और यही वह समय था जब महावीर और बुद्ध का आगमन हुआ और उन्होंने जातिवाद के खिलाफ बगावत की। इस काल में महाजनपदों का गठन हुआ और बिम्बिसार के शासन में मगध आया, अजात शत्रु, शिसुनंगा और नंदा राजवंश बने।

मौर्य काल - 322 ई.पू.-185 ई.पू.:     चन्द्रगुप्त मौर्य द्वारा स्थापित इस साम्राज्य के तहत् पूरा उत्तर भारत था और बिंदुसारा ने इसे और बढ़ाया। इस काल में हुए कलिंग युद्ध के बाद राजा अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया।

आक्रमण - 185 ई.पू.-320 ईसवीः       इस अवधि में बक्ट्रियन, पार्थियन, शक और कुषाण के आक्रमण हुए। व्यापार के लिए मध्य एशिया खुला, सोने के सिक्कों का चलन और साका युग का प्रारंभ हुआ।

डेक्कन और दक्षिण - 65 ई.पू.-250 ईसवीः        इस काल में दक्षिण भाग पर चोल, चेर और पांड्या का शासन रहा और इसी समय में अजंता एलोरा गुफाओं का निर्माण हुआ, संगम साहित्य और भारत में ईसाई धर्म का आगमन हुआ।

गुप्त साम्राज्य - 320 ईसवी-520 ईसवीः      इस काल में चन्द्रगुप्त प्रथम ने गुप्त साम्राज्य की स्थापना की, उत्तर भारत में शास्त्रीय युग का आगमन हुआ, समुद्रगुप्त ने अपने राजवंश का विस्तार किया और चन्द्रगुप्त द्वितीय ने शाक के विरुद्ध युद्ध किया। इस युग में ही शाकुंतलम और कामसूत्र की रचना हुई। आर्यभट्ट ने खगोल विज्ञान में अद्भुत कार्य किए और भक्ति पंथ भी इस समय उभरा।

छोटे राज्यों का कालः     500 ईसवी-606 ईसवीः इस युग में हूणों के उत्तर भारत में आने से मध्य एशिया और ईरान में पलायन देखा गया।

उत्तर में कई राजवंशों के परस्पर युद्ध करने से बहुत से छोटे राज्यों का निर्माण हुआ। 

हर्षवर्धन - 606 ई-647 ईसवीः       हर्षवर्धन के शासनकाल में प्रसिद्ध चीनी यात्री हेन त्सांग ने भारत की यात्रा की। हूणों के हमले से हर्षवर्धन का राज्य कई छोटे राज्यों में बँट गया।

यह वह समय था जब डेक्कन और दक्षिण बहुत शक्तिशाली बन गए। 

दक्षिण राजवंशः       500ई-750 ईसवीः इस दौर में चालुक्य, पल्लव और पंड्या साम्राज्य पनपा और पारसी भारत आए।

चोल साम्राज्यः       9वीं सदी ई-13वीं सदी ईसवीः विजयालस द्वारा स्थापित चोल साम्राज्य ने समुद्र नीति अपनाई।

अब मंदिर सांस्कृतिक और सामाजिक केन्द्र होने लगे और द्रविडि़यन भाषा फलीफूली। 

उत्तरी साम्राज्यः      750ई-1206 ईसवीः इस समय राष्ट्रकूट ताकतवर हुआ, प्रतिहार ने अवंति और पलस ने बंगाल पर शासन किसा। इस दौर ने राजपूत कुलों का उदय देखा।

खजुराहो, कांचीपुरम, पुरी में मंदिरों का निर्माण हुआ और लघु चित्रकारी शुरु हुई। इस अवधि में तुर्कों का आक्रमण हुआ। 

मध्यकालीन भारतीय इतिहास -

मुगल साम्राज्यः        फरगाना वैलर जो कि आज का उज़बेकिस्तान है, के तैमूर और चंगेज़ खान के वंशज बाबर ने सन् 1526 में खैबर दर्रे को पार किया और वहां मुगल साम्राज्य की स्थापना की, जहां आज अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश है। सन् 1600 तक मुगल वंश ने ज्यादातर भारतीय उपमहाद्वीप पर राज किया। सन् 1700 के बाद इस वंश का पतन होने लगा और आखिरकार भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम के समय सन् 1857 में पूरी तरह खात्मा हो गया।

आधुनिक भारतीय इतिहास -

उपनिवेशी कालः       16वीं सदी में पुर्तगाल, नीदरलैंड, फ्रांस और ब्रिटेन से यूरोपीय शक्तियों ने भारत में अपने व्यापार केन्द्र स्थापित किए। बाद में आंतरिक मतभेदों का फायदा उठाकर उन्होंने अपनी काॅलोनियां स्थापित कर लीं।

ब्रिटिश राजः         सन् 1600 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत आने पर यहां महारानी विक्टोरिया के शासन का ब्रिटिश राज शरु हुआ। यह सन् 1857 में भारत की स्वतंत्रता की पहली लड़ाई के बाद समाप्त हुआ।

सन् 1857 के प्रसिद्ध व्यक्ति -

बहादुर शाह ज़फर:          अधिकांश भारतीय विद्रोहियों ने बहादुर शाह ज़फर को भारत का राजा चुना और उनके अधीन वे एकजुट हो गए। अंग्रेजों की साजिश के सामने वो भी नहीं टिक पाए। उनके पतन से भारत में तीन सदी से ज्यादा पुराने मुगल शासन का अंत हो गया।

बख्त खानः         ईस्ट इंडिया कंपनी में सूबेदार रहे बख्त खान ने रोहिल्ला सिपाहियों की एक सेना का निर्माण किया। मई 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ मेरठ में सिपाहियों के विद्रोह करने के बाद वो दिल्ली में सिपाही सेना का कमांडर बन गए।

मंगल पांडेः         34वीं बंगाल नेटिव इंफैंट्री का हिस्सा रहे मंगल पांडे को 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में एक वरिष्ठ अंग्रेज अधिकारी पर हमला करने के लिए जाना जाता है। इस घटना को ही भारत की स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत माना जाता है।

नाना साहिबः       निर्वासित मराठा पेशवा बाजी राव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहिब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया था।

रानी लक्ष्मीबाईः         रानी लक्ष्मीबाई तात्या टोपे के साथ मिलकर अंग्रेज सैनिकों के खिलाफ बहादुरी से लड़ीं। 17 जून 1858 को ग्वालियर के फूल बाग इलाके के पास अंग्रेजों से लड़ते हुए उन्होंने अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।

तात्या टोपेः         नाना साहिब के करीबी सहयोगी और सेनापति तात्या टोपे ने रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी।

वीर कुंवर सिंहः        वर्तमान में बिहार के भोजपुर जिले का हिस्सा रहे जगदीशपुर के राजा ने अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र सेना का नेतृत्व किया।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और महात्मा गांधीः         20वीं सदी में महात्मा गांधी ने लाखों लोगों का नेतृत्व किया और सन् 1947 में स्वतंत्रता हेतु एक अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया।

आजादी और विभाजनः        अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति के कारण पिछले कुछ सालों में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच धार्मिक तनाव बढ़ता गया खासतौर पर पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे प्रांतों में। महात्मा गांधी ने दोनों धार्मिक समुदायों से एकता बनाए रखने की भी अपील की। दूसरे विश्व युद्ध के बाद कमजोर अर्थव्यवस्था से जूझ रहे अंग्रेजों ने भारत छोड़ने का फैसला किया, जिससे अंतरिम सरकार बनाने का रास्ता बना। आखिरकार, भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ और अंग्रेजों के कब्जे से इस क्षेत्र को सन् 1947 में आजादी मिली।

आजादी के बाद के कालः          कई सभ्यताओं जैसे ग्रीक, रोमन और मिस्त्र ने उदय और पतन देखा। भारतीय सभ्यता और संस्कृति इससे अछूती रही। इस देश पर एक के बाद एक कई आक्रमण हुए, कई साम्राज्य आए और अलग अलग हिस्सों पर शासन किया, लेकिन भारतवर्ष की अदम्य आत्मा पराजित नहीं हुई।

आज भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और सबसे जीवंत गणराज्य के तौर पर विश्व में देखा जाता है। यह एक उभरती हुई वैश्विक महाशक्ति और दक्षिण एशिया का एक प्रभावशाली देश है।

भारत एशिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है और दुनिया का सातवां सबसे बड़ा और जनसंख्या के तौर पर दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसमें एशिया का एक तिहाई हिस्सा है और मानव जाति का सातवां भाग इसमें है।

भारत का इतिहास (HISTORY OF INDIA)

प्राचीन इतिहास (ANCIENT HISTORY)

हीनयान और महायान के सम्बन्ध में विशेष जानकारी -

यहाँ हम बौद्ध धर्म की दो शाखाओं हीनयान और महायान के बीच अंतर और कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे। बुद्ध के निर्वाण के 100 वर्ष बाद ही बौद्ध धर्म दो सम्प्रदायों में विभक्त हो गया – 1. स्थविरवादी और 2. महासांघिक।  

बौद्धों की द्वितीय संगीति वैशाली में हुई। इसमें कुछ मतभेद भी अधिक उभर कर आये। सम्राट अशोक के समय बौद्धों की तीसरी संगीति के समय तक इनमें 18 सम्प्रदाय (निकाय) विकसित हो गये थे, इनमें 12 स्थविरवादियों के तथा छ: महासान्घिकों के थे।

महासान्घिकों का एक ही सम्प्रदाय थावैपुल्यवादी महासांघिक सम्प्रदाय से ही महायान सम्प्रदाय का उद्भव और विकास हुआ।

महायान और हीनयान:       महासंघिक सम्प्रदाय ने बुद्ध को अलौकिक रूप देने का प्रयत्न किया, इन्होंने बुद्ध की मूर्तियों की प्रतिष्ठा का प्रचार किया, इसके विपरीत स्थविरवादियों ने बुद्ध के मानव-रूप की रक्षा करने का प्रयास किया, स्थविरवादियों का मत था कि मनुष्य को दुःख निवृत्ति के लिए आत्म-कल्याण का प्रयत्न करना चाहिए ।

इसके विपरीत महासान्घिकों का कथन था कि अर्हत् को अपने दुःख की निवृत्ति के लिए अपने तथा प्राणिमात्र दोनों के कल्याण की ओर प्रयत्नशील रहना चाहिए।

महायान और हीनयान – भिन्न शाखाएँ कैसे:       महायान शब्द का वास्तविक अर्थ इसके दो खंडों (महा+यान) से स्पष्ट हो जाता है, “यान” का अर्थ मार्ग और “महा” का श्रेष्ठ, बड़ा या प्रशस्त समझा जाता है, तात्पर्य उस ऊँचे या प्रगतिशील मार्ग से था, जो हीनयान से बढ़कर था, यह लोकोत्तर मार्ग था, जिसका ऊँचा आदर्श था और इसी के कारण ईसा पूर्व पहली शताब्दी में ही बुद्ध धर्म में विभेद हो गया ।

वैशाली-संगीति सभा में पश्चिमी तथा पूर्वी बौद्ध अलग-अलग हो गये, जिन्होंने त्रिपिटक में कुछ परिवर्तन किया, पूर्वी शाखा को महासंघिक का भी नाम दिया जाता है, जिससे आगे चलकर महायान का नामकरण किया गया ।   बोधिसत्त्व की भावना के कारण महायान बोधिसत्त्वयान के नाम से भी साहित्य में प्रसिद्ध है ।

महायान और हीनयान में क्या अंतर है:         महायान और हीनयान के दार्शनिक सिद्धांतों में अनेक मतभेद हैं, बुद्ध के जिस क्षणिकवाद की हीनयानियों ने वस्तों का अभावात्मक रूप कहकर व्याख्या की, महायानियों ने उसकी शून्यवाद के रूप में प्रतिष्ठा की, इनका कहना है कि शून्यवाद अभावात्मक नहीं है, अपितु व्याहारिक जगत से परे पारामार्थिक सत्ता विद्यमान है, यह लौकिक विचारों से अवर्णनीय होने के कारण ही अभावरूप कहलाती है, मन-वाणी से अगोचर होने के कारण ही यह शून्य है ।

हीनयान और महायान के निर्वाण की कल्पना में भी थोड़ा-सा मतभेद है, हीनयान के अनुसार निर्वाण सत्य, नित्य, पवित्र और दुःखाभावरूप है, महायानी इस निर्वाण की प्रथम तीन विशेषताओं को स्वीकार करके अंतिम विशेषता में परिवर्तन करते हैं, इनका निर्वाण वेदांत की मुक्ति के सदृश है ।

यह भी दृष्टव्य है कि हीनयान सम्प्रदाय के ग्रन्थ अधिकतर पाली भाषा में है, जबकि महायान सम्प्रदाय के ग्रन्थ संस्कृत भाषा में है । 

महायान सम्प्रदाय ने जीवन का एक नया उच्च आदर्श जनता के समक्ष प्रस्तुत किया, उन्होंने कहा कि प्राणिमात्र के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देना ही परम कर्तव्य है, परकल्याण के लिए कुछ भी अदेय नहीं है, इस हेतु उन्होंने बुद्ध के अनेक पूर्व जन्मों की कल्पना बोधिसत्व के रूप में की, बुद्ध पद प्राप्त करने से पहले सिद्धार्थ ने बोधिसत्व के रूप में अनेक जन्म लिए थे, उन्होंने दु:खों से संतप्त प्राणियों की पीडाओं के निवारण के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया था, महायानियों का कथन था कि मनुष्य को चाहिए कि केवल अपना कल्याण ही न करे, अपितु प्राणिमात्र का भी कल्याण करे, सबका कल्याण करने की प्रवृत्ति के कारण उन्होंने अपने को महायानी कहा, शेष बौद्धों को केवल आत्म-कल्याण करने में संलग्न होने के कारण उन्होंने हीनयान नाम दिया क्योंकि इसमें बहुत लोग सवार नहीं हो सकते हैं, हीनयान का साधक अपने ही निर्वाण का प्रयत्न करता है, महायान का साधक अधिक उदार लक्ष्य रखता है ।

Most Important Questions of Indian History in Hindi

इस पोस्ट में हम आपसे शेयर करने वाले हैं Indian History Questions जो बार बार प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं, ये प्रश्न सभी प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, UPPSC, Railways तथा SSC के लिए बेहद उपयोगी हैं, हम सभी Subjects के लिए ऐसे ही प्रश्न आपके साथ Share करने वाले हैं तो हमारे Facebook Page को Like करना ना भूलें |

सभी प्रश्नों के उत्तर अंत में दिए गए हैं –

1- सूफियों की भाषा में ‘जियारत’ क्या था ?

(a) संतों के मकबरों की, बरकत (आध्यात्मिक कृपा) प्राप्त करने के लिए तीर्थयात्रा

(b) ईश्वरीय नाम गायन

(c)  फुतूह (बे-मांगा दान) पर चलाई जा रही नि:शुल्क रसोई अर्पित करना

(d) औकाफ़ (पूर्त न्यास) स्थापित करना

2- लिखित में से कौन सा /से बुद्ध के जीवन से संबंधित नहीं था /थे?

1. कन्थक         2. अलार कलाम    3. चन्ना     4. गौशाला मक्खलिपुत्त

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए

(a) केवल 1

(b) केवल 4

(c)  1 और 2

(d) 3 और 4

3- भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के दौरान नहीं शेरों का प्रादुर्भाव हुआ |  कलकात्ता, जो अब कोलकाता है, प्रथम शहरों में से एक था निम्नलिखित में से कौन से गांव से मिलकर कोलकाता शहर बना था ?

(a) मिदनापुर, चटगांव, बर्दवान

(b) परगना, कलिकाता, ठाकुर गांव

(c)  सुतानुटि, कलिकाता, गोविंदपुर

(d) मिदनापुर, ठाकुरगांव, गोविंदपुर

4- 1919 के भारत सरकार अधिनियम ने

1. केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल स्थापित किया |

2. प्रांतीय कार्यकारिणी में द्विशासन आरंभ किया |

3. भारत में संघीय शासन प्रणाली को आरंभ किया |

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए –

(a ) 1 और 3

(b)  2 और 3

(c) 1, 2 और 3

(d)  1 और 2

5- तेरहवीं और चौदहवीं सदी ईसवी में भारतीय किसान खेती नहीं करते थे –

(a) गेहूं की

(b) जौ की

(c)  चावल की

(d) मक्का की

6- महाभाष्य के लेखक पतंजलि समसामयिक थे –

(a) चंद्रगुप्त मौर्य के

(b) अशोक के

(c) पुष्यमित्र शुंग के

(d) चंद्रगुप्त प्रथम के

7- गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण जिस राज्य में हुआ था वह है –

(a) अंग

(b) मगध

(c) मल्ल (कुशीनगर)

(d) वत्स

8- बुद्ध ने सर्वाधिक उपदेश दिए थे –

(a) वैशाली में

(b) श्रावस्ती में

(c) कौशांबी में

(d) राजगृह में

9- गुप्तकाल में वाराहमिहिर प्रसिद्ध पुस्तक ‘वृहत् संहिता’ की रचना किस विषय पर आधारित प्रबंध था ?

(a) खगोल विज्ञान

(b) शासन कला

(c) चिकित्सा की आयुर्वेद पद्धति

(d) अर्थशास्त्र

10- 1756 में ब्रिटिश द्वारा की गई कोलकाता की किलेबंदी को बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ने क्या माना ?

(a) बड़े पैमाने पर बिट्रिश व्यापार की वृद्धि

(b) अपनी प्रभुता पर आक्रमण

(c) भारत में ब्रिटिश की असुरक्षा

(d) बंगाल पर ब्रिटिश नियंत्रण

11- आजादी की लड़ाई में कौन सा रसायन एक महत्वपूर्ण प्रतीक चिन्ह था ?

(a) ग्लूकोज

(b) खाद

(c) औषधि

(d) सोडियम, क्लोराइड

12- निम्नलिखित सूफियों में कौन कृष्ण को औलिया के अंतर्गत मानता था ?

(a) शाह अब्दुल अजीज

(b) शाह वलीउल्लाह

(c) शाह कलीमुल्लाह

(d) मोहम्मद गौस

13- राजकुमार जो अपने पिता की मृत्यु के लिए उत्तरदाई था –

(a) अज्ञात शत्रु

(b) चंड प्रद्योत

(c) प्रसेनजित

(d) उदयन

14- पहला गुप्त शासक जिसने सिक्के जारी किए थे –

(a) श्रीगुप्त

(b) चंद्रगुप्त प्रथम

(c) समुद्रगुप्त

(d) चंद्रगुप्त द्वितीय

15- निम्नलिखित सूफियों में से कौन एक सर्वप्रथम अजमेर में बस गए थे ?

(a) शेख मइनुद्दीन चिश्ती

(b) शेख कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी

(c) शेख निजामुद्दीन औलिया

(d) शेख सलीम चिश्ती

16- निम्न में से किसे ‘हिंदी खड़ी बोली का जनक’ माना जाता है ?

(a) अमीर खुसरो

(b) मलिक मोहम्मद जायसी

(c) कबीर

(d) अब्दुल रहीम खान-ऐ-खाना

17- ‘एक वर्ष में स्वराज’ का नारा गांधी जी ने कब दिया ?

(a) दांडी मार्च के समय

(b) असहयोग आंदोलन के साथ

(c) सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय

(d) गोलमेज सम्मेलन के समय

18- दिल्ली सल्तनत का सर्वाधिक विद्वान शासक जो खगोल शास्त्र, गणित एवं आयुर्वीज्ञान सहित अनेक विधाओं में माहिर था?

(a) इल्तुतमिश

(b) अलाउद्दीन खिलजी

(c) मोहम्मद बिन तुगलक

(d) सिकंदर लोदी

19- निम्नलिखित में से कौन सा कथन जजमानी व्यवस्था के बारे में सत्य नहीं है ?

(a) यह बाजारेतर विनिमय व्यवस्था थी

(b) यह पूर्व औपनिवेशिक काल के दौरान अनेक गांव और क्षेत्रों में प्रथा मे थी

(c) यह औपनिवेशिक शासन के दबाब के तहत शुरू कर दी गई थी

(d) यह विनिमय की अपेक्षाकृत अधिक व्यापक नेटवर्कों में संभावित तिथि जिसके द्वारा कृषि उत्पाद व अन्य वस्तुओं परिसंचालित होती थी?

20- निम्नलिखित में से किसने आगरा की स्थापना की थी ?

(a) बलबन ने

(b) बहलोल लोदी ने

(c) सिकंदर लोदी ने

(d) फिरोज तुगलक ने

उत्तरमाला - Answers -

(a) 2. (b) 3. (c) 4. (d) 5. (d) 6. (c) 7. (c) 8. (b) 9. (a) 10. (a) 11. (d) 12. (d) 13. (a) 14. (b) 15. (a) 16. (a) 17. (b) 18. (c) 19. (c) 20. (c)

सिन्धु घाटी सभ्यता में व्यापार और उद्योग

सिन्धु घाटी सभ्यता में कृषि – Agriculture in Indus Valley Civilization

सिन्धु घाटी सभ्यता स्थलों से प्राप्त अवशेष

हड़प्पा समाज, राजनैतिक संगठन, प्रशासन एवं धर्म

सिन्धु घाटी सभ्यता में नगर-योजना – Town Planning in Hindi

प्रमुख बौद्ध स्थल – Buddhist Places in India

मौर्य साम्राज्य का पतन – Decline of the Maurya Dynasty

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