Ayurved GK MCQ PDF Part 2 – 1500+ Questions with Answers (आयुर्वेदिक प्रश्नोत्तरी)
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Ayurved GK MCQ PDF Part 2 – 1500+ Questions with Answers (आयुर्वेदिक प्रश्नोत्तरी)

 

Ayurveda MCQ questions answers PDF for AIAPGET BAMS preparation

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चरकसंहिता सूत्रस्थान

 

आयुर्वेद प्रश्नावली- चरकसंहिता सूत्रस्थान से सम्बन्धित १००० प्रश्नोत्तर

 

Set 2: (01 to 350)

 

(1) चरक संहिता के आद्य उपदेष्टा हैं-

(क) पुर्नवसु आत्रेय (ख) अग्निवेश (ग) चरक (घ) दृढ़बल

(2) चरकसंहिता के 'भाष्यकार' कौन हैं?

(क) पुर्नवसु आत्रेय (ख) अग्निवेश (ग)चरक (घ) चक्रपाणि

(3) चरकसंहिता के ‘सम्पूरक’ कौन हैं?

(क) आत्रेय (ख) चरक (ग) चक्रपाणि (घ) दृढबल

(4) चरकसंहिता के ‘प्रतिसंस्कर्ता’ कौन हैं?

(क) अग्निवेश (ख) चरक (ग) चक्रपाणि (घ) दृढबल

(5) ‘अग्निवेश तंत्र’ के प्रतिसंस्कर्ता कौन है?

(क) चरक (ख) दृढबल (ग) चक्रपणि (घ) भट्टार हरिश्चन्द्र

(6) आचार्य चरक का काल है-

(क) 1000 ई.पूर्व (ख) 1000 ई.पश्चात् (ग) 200 ई.पूर्व. (घ) 200 ई.पश्चात्

(7) चरक संहिता में क्रमशः कितने स्थान और कितने अध्याय हैं?

(क) 8, 120 (ख) 6,186 (ग) 8, 150 (घ) 6, 120

(8) चरक संहिता के चिकित्सा स्थान में कुल कितने अध्याय है?

(क) 30 (ख) 40 (ग) 46 (घ) 60

(9) निम्नलिखित में से कौन सा स्थान चरक संहिता में हैं?

(क) विमान (ख) खिल (ग) उत्तर तंत्र (घ) उर्पयुक्त सभी

(10) चरक संहिता के इन्द्रिय स्थान में कुल कितने अध्याय हैं।

(क) 08 (ख) 06 (ग) 12 (घ) 24

(11) चरकसंहिता में कुल कितने श्लोक हैं?

(क) 1950 (ख) 9295 (ग) 12000 (घ) 8300

(12) चरकसंहिता में कुल कितने औषध योगों का वर्णन है?

(क) 1950 (ख) 9295 (ग) 12000 (घ) 8300

(13) चरकसंहिता में कुल सूत्र कितने हैं?

(क) 1950 (ख) 9295 (ग) 12000 (घ) 8300

(14) चरक संहिता पर लिखित कुल संस्कृत टीकाएं हैं-

(क) 17 (ख) 19 (ग) 43 (घ) 44

(15) वृहत्रयी ग्रन्थों में सर्वाधिक टीकाएं किस ग्रन्थ पर लिखी गयी है?

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहिता (ग) अष्टांग हृदय (घ) अष्टांग संग्रह

(16) चरक संहिता पर रचित टीका 'निरंतर पदव्याख्या' के लेखक कौन हैं।

(क) जेज्जट (ख) चक्रपाणि (ग) हेमाद्री (घ) गयदास

(17) चरक संहिता पर रचित टीका ‘चरकोपस्कार’के टीकाकार कौन है।

(क) भट्टार हरिश्चन्द्र (ख) गंगाधर राय (ग) योगेन्द्रनाथसेन (घ) जेज्जट

(18) चरक संहिता की 'जल्पकल्पतरू' व्याख्या के टीकाकार कौन थे।

(क) गंगाधर रॉय (ख) योगेन्द्र सेन (ग) गणनाथ सेन (घ) शिवदास सेन

(19) चरक संहिता पर रचित ‘चरकन्यास’ टीकाके टीकाकार कौन है।

(क) जेज्जट (ख) योगेन्द्र सेन (ग) स्वामीकुमार (घ) भट्टार हरिश्चन्द्र

(20) कविराज गंगाधर रॉयका काल हैं ?

(क) 13वीशताब्दी (ख) 15वीं शताब्दी (ग) 17वीं शताब्दी (घ) 19वीं शताब्दी

(21) चरक संहिता पर रचित चक्रपाणि की टीकाहैं ?

(क) दीपिका (ख) गूढ़ार्थ दीपिका (ग) आयुर्वेद दीपिका (घ) गूढान्त दीपिका

(22) निम्न में से कौन एक चरक संहिता की टीकाकार है।

(क) योगेन्द्रनाथ सेन (ख) रूद्रभट्ट (ग) कौटिल्य (घ) डल्हण

(23) चक्रपाणि का काल क्या हैं ?

(क) 11वीं शताब्दी (ख) 12वीं शताब्दी (ग) 13वीं शताब्दी (घ) 16वीं शताब्दी

(24) चरकसंहिता की ‘चरक प्रकाश कौस्तुभ’ टीका के टीकाकार का काल है ?

(क) 11वीं शती (ख) 15वीं शती (ग) 17वीं शती (घ) 19वीं शती

(25) चरक संहिता पर रचित हिन्दी टीका 'वैद्य मनोरमा' के लेखक कौन हैं।

(क) जयदेव विद्यालंकार (ख) अत्रिदेव विद्यालंकार (ग) ब्रह्मानन्द त्रिपाठी (घ) रविदत्त त्रिपाठी

(26) चरक संहिता का अरबी अनुवाद कौनसी सदी में हुआ था।

(क) 8वीशताब्दी (ख) 9वीं शताब्दी (ग) 11वीं शताब्दी (घ) 13वीं शताब्दी

(27) ’अमितायु’ किसका पर्याय कहा गया है।

(क) इन्द्र (ख) भरद्वाज (ग) अग्निवेश (घ) आत्रेय

(28) ‘चन्द्रभागा’ किसका नाम था।

(क) पुर्नवसु आत्रेय (ख) आत्रेय पुत्र (ग) आत्रेय माता (घ) आत्रेय पिता

(29) आत्रेय के शिष्यों की संख्या कितनी हैं।

(क) 5 (ख) 6 (ग) 7 (घ) 8

(30) क्षारपाणि किसका शिष्य था।

(क) पुर्नवसु आत्रेय (ख) अत्रि (ग) भिक्षु आत्रेय (घ) अग्निवेश

(31) निम्न में से सभी आत्रेय के शिष्य है एक को छोडकर -

(क) अग्निवेश (ख) जतूकर्ण, पाराशर (ग) हारीत, क्षारपाणि (घ) चक्रपाणि, चरक

(32) चरक किसके शिष्य थे।

(क) पुर्नवसु आत्रेय (ख) धन्वतरि (ग) वैशम्पायन (घ) अग्निवेश

(33) चरक किसके पुत्र थे।

(क) पुर्नवसु आत्रेय (ख) विश्वामित्र (ग) विशुद्ध (घ) वैशम्पायन

(34) आचार्य चरक वर्तमान भारत वर्ष के किस राज्य के निवासीथे।

(क) पंजाब (ख) काश्मीर (ग) राजस्थान (घ) केरल

(35) दृढ़बल के पिता कौन थे।

(क) चरक (ख) कपिलबली (ग) विश्वामित्र (घ) इन्दु

(36) दृढ़बल ने चरक संहिता के चिकित्सा स्थान में कितने अध्यायों को पूरित कर सम्पूर्ण किया हैं।

(क) 17 (ख) 15 (ग) 14 (घ) 13

(37) चरक संहिता चिकित्सा स्थान का निम्न में से कौनसा अध्याय दृढबल द्वारा पूरित नहीं है।

(क) पाण्डु चिकित्सा (ख) ग्रहणी चिकित्सा (ग) छर्दि चिकित्सा (घ) अतिसार चिकित्सा

(38) चरक संहिता को 'अखिलशास्त्रविद्याकल्पद्रुम' किसने कहा है।

(क) गंगाधर रॉय (ख) भट्टार हरिश्चन्द्र (ग) चक्रपाणि (घ) शिवदास सेन

(39) चरक संहिता में 'उत्तर तंत्र' शामिल था - ऐसा किसने कहा है।

(क) गंगाधर रॉय (ख) भट्टार हरिश्चन्द्र (ग) चक्रपाणि (घ) शिवदास सेन

(40) वृहत्रयी ग्रन्थों में ‘मूर्धन्य’ संहिता कौनसी है ?

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहिता (ग) अष्टांग हृदय (घ) अष्टांग संग्रह

(41) चक्रपाणि का सम्बन्ध कौनसे वंश से था ?

(क) लोध्रवंश (ख) लोध्रबली वंश (ग) मौर्य वंश (घ) शुंगवंश

(42) गुरूसूत्र, शिष्यसूत्र, एकीयसूत्र एवं प्रतिसंस्कर्ता सूत्र के रूप में वर्णन किसका ग्रन्थ का है ?

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुतसंहिता (ग) दोनों (घ) काश्यपसंहिता

(43) ‘तुरीय अवस्था’ किससे संबंधित है।

(क) निद्रा (ख) स्वप्न (ग) ब्रह्म (घ) मोक्ष

(44) ‘उभयाभिप्लुता’चिकित्सा किसका योगदान हैं।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) उर्पयुक्त सभी

(45) चरकसंहिता के सूत्रस्थान के स्वस्थ्य चतुष्क में कौन-कौन से अध्याय आते हैं।

(क) 1,2,3,4 (ख) 5,6,7,8 (ग) 9,10,11,12 (घ) 13,14,15,16

(46) चरक संहिता मे त्रिशोथीयाध्याय कौनसे चतुष्क से सम्बधित है।

(क) रोग चतुष्क (ख) योजना चतुष्क (ग) निर्देश चतुष्क (घ) क्रिया चतुष्क

(47) चरक संहिता मे कुल कितने स्थानों पर संभाषा परिषद का उल्लेख मिलता है।

(क) 7 (ख) 4 (ग) 2 (घ) 1

(48) चरक संहिता के सूत्रस्थान कुल कितने स्थानों पर संभाषा परिषद का उल्लेख मिलता है।

(क) 7 (ख) 4 (ग) 2 (घ) 1

(49) अथातो दीर्घ×जीवितीयमध्यायं व्याख्यास्यामः। - इस सूत्र में कितने पद है।

(क) 6 (ख) 7 (ग) 8 (घ) 9

(50) ’उग्रतपा’ किसका पर्याय कहा गया है।

(क) इन्द्र (ख) भरद्वाज (ग) अग्निवेश (घ) आत्रेय

(51) चरक संहिता के ‘दीर्घ×जीवितीयमध्याय’ में आयुर्वेदावतरण संबंधी सम्भाषा परिषद में कितने ऋर्षियों ने भाग लिया था।

(क) 56 (ख) 57 (ग) 53 (घ) 60

(52) 'धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम्।'- उपर्युक्त सूत्र किस संहिता में वर्णित हैं।

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहिता (ग) अष्टांग हृदय (घ) अष्टांग संग्रह

(53) चरक संहितामें ‘बलहन्तार’किसका पर्याय कहा गया है।

(क) इन्द्र (ख) भरद्वाज (ग) राजयक्ष्मा (घ) प्रमेह

(54) चरक संहिता के अनुसार इन्द्र के पास आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त करने कौन गया था।

(क) आत्रेय (ख) भरद्वाज (ग) अश्विनी द्वय (घ) अग्निवेश

(55) आचार्य चरक ने 'हेतु, लिंग, औषध’ को क्या संज्ञा दी है।

(क) त्रिसूत्र (ख) त्रिस्कन्ध (ग) त्रिस्तंभ (घ) अ, ब दोनों

(56) 'स्कन्धत्रय'है ?

(क) हेतु, लिंग, औषध (ख) हेतु, दोष, द्रव्य (ग) वात, पित्त, कफ (घ) सत्व, रज, तम

(57) चरक संहिता के अनुसार षटपदार्थ का क्रम है ?

(क) द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय (ख) सामान्य,विशेष, गुण, द्रव्य, कर्म, समवाय (ग) सामान्य, विशेष, द्रव्य, गुण, कर्म, समवाय (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं

(58) वैशेषिक दर्शनके अनुसार षटपदार्थ का क्रम है ?

(क) द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय (ख) सामान्य, विशेष, गुण, द्रव्य, कर्म, समवाय (ग) सामान्य, विशेष, द्रव्य, गुण, कर्म, समवाय (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं

(59) ‘हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्। मानं चतच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते।’- यह आयुर्वेद की ..... है।

(क) निरूक्ति (ख) व्युत्पत्ति (ग) परिभाषा (घ) फलश्रुति

(60) निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही हैं ?

(क) ‘नित्यग’ आयुका पर्याय है एंव काल का भेद है। (ख) ‘अनुबन्ध’ आयु का पर्याय है एंव दोष का भेद है। (ग) ‘अनुबन्ध’दशविध परीक्ष्य भाव में से एक भाव है। (घ) उर्पयुक्त सभी

(61) ‘तस्य आयुषः पुण्यतमो वेदो वेदविदां मतः’ - उक्त सूत्र का उल्लेख किस ग्रन्थ में है ?

(क) चरक संहिता (ख) सुश्रुत संहिता (ग) अष्टांग संग्रह (घ) अष्टांग ह्रदय।

(62) सामान्यके 3 भेद 'द्रव सामान्य, गुण सामान्य और कर्म सामान्य'- किसने बतलाये है।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) आत्रेय (घ) चक्रपाणि

(63) ‘सत्व, आत्मा, शरीर’-ये तीनों कहलाते है।

(क) त्रिसूत्र (ख) त्रिस्कन्ध (ग) त्रिदण्ड (घ) त्रिस्तंभ

(64) परादि गुणोंकी संख्या हैं ?

(क) 6 (ख) 5 (ग) 20 (घ) 10

(65) चिकित्सीय गुण हैं।

(क) इन्द्रिय गुण (ख) गुर्वादि गुण (ग) परादि गुण (घ) आत्म गुण

(66) ‘चिकित्सा की सिद्धि केउपाय’गुण हैं।

(क) इन्द्रिय गुण (ख) गुर्वादि गुण (ग) परादि गुण (घ) आत्म गुण

(67) गुर्वादि गुण को शारीरिक गुण की संज्ञा किसने दी हैं।

(क) चरक (ख) चक्रपाणि (ग) योगीनाथ सेन (घ) गंगाधर राय

(68) आत्म गुणों की संख्या 7 किसने मानी हैं।

(क) चरक (ख) चक्रपाणि (ग) योगीनाथ सेन (घ) गंगाधर राय

(69) सात्विक गुणो में शामिल नही हैं।

(क) सुख (ख) दुःख (ग) प्रयत्न (घ) उत्साह

(70) निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही हैं ?

(क) ‘गुर्वादि गुण’ का विस्तृत वर्णन सुश्रुत और हेमाद्रि ने किया है। (ख) ‘परादि गुण’ का विस्तृत वर्णन केवल चरक संहिता में है। (ग) ‘इन्द्रिय और आत्म गुण’ का विस्तृत वर्णन तर्क संग्रह में है। (घ) उपर्युक्त सभी

(71) गुण के बारे में कौन सा कथन सही नहीं हैं।

(क) समवायी (ख) निश्चेष्ट (ग) चेष्ट (घ) द्रव्याश्रयी

(72) कारण द्रव्यों की संख्या है-

(क) 5 (ख) 8 (ग) 9 (घ) 10

(73) द्रव्य के प्रकार होते हैं-

(क) 2 (ख) 3 (ग) 9 (घ) असंख्य

(74) द्रव्य के भेद होते है।

(क) 2 (ख) 3 (ग) 9 (घ) असंख्य

(75) 'सेन्द्रिय' का क्या अर्थ होता है ?

(क) इन्द्रिय युक्त (ख) चेतन युक्त (ग) सत्व युक्त (घ) उर्पयुक्त कोई नहीं

(76) ‘क्रियागुणवत समवायिकारणमिति द्रव्यलक्षणम्’- किसका कथन है।

(क) चरक (ख)सुश्रुत (ग) वैशेषिक दर्शन (घ) नागार्जुन

(77) कर्म के 5 भेद - उत्क्षेपण, अवक्षेपण, आकुन्चन, प्रसारण तथा गमन।- किसने बतलाये है।

(क) चरक (ख) चक्रपाणि (ग) वैशेषिक दर्शन (घ) न्याय दर्शन

(78) ‘घटादीनां कपालादौ द्रव्येषु गुणकर्मणौः। तेषु जातेÜच सम्बन्धः समवायः प्रकीर्तितः।।’ - किसका कथन है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) तर्क संग्रह (घ) कारिकावली

(79) आचार्य चरक ने ‘षटपदार्थ’ क्या कहा हैं।

(क) कारण (ख) कार्य (ग) पदार्थ (घ) प्रमाण

(80) आचार्य चरक कौनसे वाद को मानते हैं।

(क) कार्यकारण वाद (ख) विवर्तवाद (ग) क्षणभंगुरवाद (घ) असद्कार्यवाद

(81) व्याधिका अधिष्ठान है।

(क) शरीर . (ख) मन (ग) मन और शरीर (घ) मन, शरीर,इन्द्रियॉ

(82) वेदना का अधिष्ठान है ? (च.शा.1/136)

(क) शरीर . (ख) मन (ग) इन्द्रियॉ (घ) उर्पयुक्त सभी

(83) निर्विकारः परस्त्वात्मा सर्वभूतानां निर्विशेषः। सत्वशरीरयोश्च विशेषाद् विशेषोपलब्धिः।- है।

(क) (च.सू.1/36) (ख) (च. सू.1/52) (ग) (च. शा.4/33) (घ) (च.शा.1/36)

(84) वात पित्त श्लेष्माण एव देह सम्भव हेतवः। - किसआचार्य का कथन हैं।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) वाग्भट्ट (घ) काश्यप

(85) मानसिक दोषों की संख्या है।

(क) 1 (ख) 2 (ग) 3 (घ) उर्पयुक्तकोई नहीं

(86) मानसिक दोषों में प्रधान होता है।

(क) सत्व (ख) रज (ग) तम (घ) उर्पयुक्त कोई नहीं

(87) मानसिक गुण नहीं है।

(क) सत्व (ख) रज (ग) तम (घ) उर्पयुक्त कोई नहीं

(88)चरकानुसार शारीरिक दोषों की चिकित्सा है।

(क) दैवव्यपाश्रय, (ख) युक्तिव्यापश्रय (ग) दोनों (घ) उर्पयुक्त कोई नहीं

(89) चरकानुसार मानसिक दोष का चिकित्सा सूत्र है।

(क) ज्ञान, विज्ञान, धी, धैर्य, समाधि (ग) ज्ञान, विज्ञान, धी, धैर्य, स्मृति (ख) ज्ञान, विज्ञान, योग, स्मृति, समाधि (घ) ज्ञान, विज्ञान, धैर्य, स्मृति, समाधि

(90) आचार्य चरक ने कफ के कितने गुण बतलाए हैं।

(क) 5 (ख) 6 (ग) 7 (घ) 8

(91) ‘सर’ कौनसे दोष का गुण हैं।

(क) वात (ख) पित्त (ग) कफ (घ) रक्त

(92) चरकोक्त वात के 7 गुणों एवं कफ के 7 गुणों में कितने समान है।

(क) 1 (ख) 2 (ग) 3 (घ) उर्पयुक्तकोई नहीं

(93) ‘साधनं न त्वसाध्यानां व्याधीनां उपदिश्यते।’ - असाध्य रोगों की चिकित्सा न करने का उपदेश किसने दिया है।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) वाग्भट्ट (घ) काश्यप

(94) रसनार्थो रसः द्रव्यमापः .....। निर्वृतौ च, विशेषें च प्रत्ययाः खादयस्त्रयः।

(क) पृथ्वीस्तथा (ख) अनलस्तथा (ग) क्षितिस्तथा (घ) अनिलस्तथा

(95) रस के विशेष ज्ञान में कारणहै।

(क) जल, वायु, पृथ्वी (ख) पृथ्वी, जल अग्नि (ग) आकाश, जल, पृथ्वी (घ) आकाश, वायु, अग्नि

(96) पित्त शामक रसहै।

(क) मधुर, अम्ल, लवण (ख) कटु, अम्ल, लवण (ग) कटु, तिक्त, कषाय (घ) मधुर, तिक्त, कषाय

(97) कफ प्रकोपक रसहै।

(क) मधुर, अम्ल, लवण (ख) कटु, अम्ल, लवण (ग) कटु, तिक्त, कषाय (घ) मधुर, तिक्त, कषाय

(98) निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही हैं ?

(क) चरक ने मधुर रस के लिए ‘स्वादु’ एवं कटु रस के लिए ‘कटुक’ शब्द का प्रयोग किया है। (च.सू.1/64) (ख) अष्टांग संग्रहकार ने कटु रस के लिए ‘ऊषण’ शब्द का प्रयोग किया है। (अ. सं. सू. 1/35) (ग) अष्टांग हृदयकार ने लवण रस के लिए ‘पटु’ शब्द का प्रयोग किया है। (अ. हृ. नि.1/16) (घ) उर्पयुक्त सभी।

(99) चरकानुसार जांगमद्रव्यों के प्रयोज्यांग होते है।

(क) 18 (ख) 19 (ग) 8 (घ) 6

(100) चरकानुसार औद्भिदद्रव्यों के प्रयोज्यांग होते है।

(क) 18 (ख) 19 (ग) 8 (घ) 6

(101) ‘औद्भिद’ किसका प्रकार है।

(क) द्रव्य (ख) लवण (ग) जल (घ) उपर्युक्त सभी

(102) ‘उदुग्बर’ है।

(क) वनस्पति (ख) वानस्पत्य (ग) वीरूध (घ) औषधि

(103)फल पकने पर जिसका अन्त हो जाए वह है ?

(क) वनस्पति (ख) वानस्पत्य (ग) वीरूध (घ) औषधि

(104) जिनमें सीधे ही फल दृष्टिगोचर हो - वह है ?

(क) वनस्पति (ख) वानस्पत्य (ग) वीरूध (घ) औषधि

(105) सुश्रुतानुसार ‘जिसमें पुष्प और फलदोनों आते है’ - वह स्थावर कहलाता है।

(क) वनस्पत्य (ख) वानस्पत्य (ग) वृक्षा (घ) उपर्युक्त सभी

(106) 16 मूलिनी द्रव्यों में शामिल नहीं है।

(क)बिम्बी (ख) हस्तिपर्णी (ग) गवाक्षी (घ) प्रत्यकश्रेणी

(107) चरकोक्त 16 मूलिनी द्रव्यों में ‘छर्दन’ किसका कार्य है।

(क)शणपुष्पी (ख) बिम्बी (ग) हैमवती (घ) उपर्युक्त सभी

(108) चरकोक्त 16 मूलिनी द्रव्यों में ‘विरेचन’ हेतु कितने द्रव्य है।

(क) दश (ख) एकादश (ग) षोडश (घ) चतुर्विध

(109) चरकोक्त 19 फलिनी द्रव्यों में शामिल नहीं है।

(क) क्लीतक (ख) आरग्वध (ग) प्रत्यक्पुष्पा (घ) सदापुष्पी

(110) चरकोक्त 19 फलिनी द्रव्यों में शामिल नहीं है ?

(क) आमलकी (ख) हरीतकी (ग) कम्पिल्लक (घ) अन्तकोटरपुष्पी

(111) चरकानुसार क्लीतक (मुलेठी) के कितने भेद होते है।

(क) 2 (ख) 3 (ग) 5 (घ) उपर्युक्त कोई नहीं

(112) चरकोक्त 19 फलिनी द्रव्यों में नस्य हेतु कितने द्रव्य है।

(क) 1 (ख) 2 (ग) 3 (घ) 8

(113) चरकोक्त 19 फलिनी द्रव्यों में ‘विरेचन’ हेतु कितने द्रव्य है।

(क) दश (ख) एकादश (ग) अष्ट (घ) एकोनविशंति

(114) स्नेहना जीवना बल्या वर्णापचयवर्धनाः। - किसका गुण है।

(क) मांस (ख) मद्य (ग) पयः (घ) महास्नेह

(115) महास्नेह की संख्याहै।

(क) 2 (ख) 3 (ग) 4 (घ) 8

(116) चरकानुसार ‘प्रथम लवण’ है।

(क) सैंन्धव (ख) सौवर्चल (ग) सामुद्र (घ) विड

(117) रस तरंगिणी के अनुसार ‘प्रथम लवण’ है।

(क) सैंन्धव (ख) सौवर्चल (ग) सामुद्र (घ) विड

(118) चरकानुसार ‘पंच लवण’ में शामिल नहीं है ?

(क) सौवर्चल (ख) सामुद्र (ग) औद्भिद (घ) रोमक

(119) रस तरंगिणी के अनुसार‘पंच लवण’ में शामिल नहीं है ?

(क) सौवर्चल (ख) सामुद्र (ग) औद्भिद (घ) रोमक

(120) अष्टमूत्र के संदर्भ में ‘लाघवं जातिसामान्ये स्त्रीणां, पुंसां च गौरवम्’ - किस आचार्य का कथन है।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) हारीत (घ) भाव प्रकाश

(121) चरकानुसार मूत्र में ‘प्रधान रस’होता है।

(क) तिक्त (ख) कटु (ग) लवण (घ) कषाय

(122) चरकानुसार मूत्र का ‘अनुरस’होता है।

(क) तिक्त (ख) कटु (ग) लवण (घ) कषाय

(123) पाण्डुरोग उपसृष्टानामुत्तमं .....चोत्यते। श्लेष्माणं शमयेत्पीतं मारूतं चानुलोमयेत्।

(क) मूत्र (ख) गोमूत्र (ग) शर्म (घ) पित्तविरेचन

(124) चरकानुसार मूत्र का गुण है।

(क) वातानुलोमन (ख) पित्तविरेचक (ग) कफशामक (घ) उपर्युक्त सभी

(125) वाग्भट्टानुसार मूत्र होता है।

(क) पित्तविरेचक (ख) पित्तवर्धक (ग) विषापह (घ) रसायन

(126) ‘मूत्रं मानुषं च विषापहम्।’ - किस आचार्य का कथन है -

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) अष्टांग संग्रह (घ) भाव प्रकाश

(127) हस्ति मूत्र का रस होता है।

(क) तिक्त (ख) कटु,तिक्त (ग) लवण (घ) क्षार

(128) माहिषमूत्र का रस होता है।

(क) तिक्त (ख) कटु,तिक्त (ग) लवण (घ) क्षार

(129) किसकामूत्र ‘सर’ गुण वाला होता है।

(क) हस्ति (ख) उष्ट्र (ग) माहिषी (घ) वाजि

(130) किसकामूत्र ‘पथ्य’ होता है।

(क) गोमूत्र (ख) अजामूत्र (ग) उष्ट्रमूत्र (घ) खरमूत्र

(131) कुष्ठ व्रण विषापहम् - मूत्र है।

(क) हस्ति (ख) आवि (ग) माहिषी (घ) वाजि

(132) चरकानुसार ‘अर्श नाशक’ मूत्र है।

(क) हस्ति (ख) उष्ट्र (ग) माहिषी (घ) उपर्युक्त सभी

(133) उन्माद, अपस्मार, ग्रहबाधा नाशकमूत्र है ?

(क) हस्ति (ख) उष्ट्र (ग) खर (घ) वाजि

(134) चरक ने ‘श्रेष्ठं क्षीणक्षतेषु च’किसके लिए कहा है।

(क) महास्नेह (ख)मांस (ग) पयः (घ) नागबला

(135) पाण्डुरोगेऽम्लपित्ते च शोषे गुल्मे तथोदरे। अतिसारे ज्वरे दाहे च श्वयथौ च विशेषतः। - किसके लिए कहा है।

(क) महास्नेह (ख) अष्टमूत्र (ग) पयः (घ) घृत

(136) चरक संहिता में मूलनी, फलिनी, लवण और मूत्र की संख्या क्रमशःहै।

(क) 19, 16, 5, 8 (ख) 16, 19, 5, 8 (ग) 16, 19, 8, 5 (घ) 19, 16, 4, 8

(137) शोधनार्थ वृक्षों की संख्याकी संख्या है।

(क) 2 (ख) 3 (ग) 4 (घ) 6

(138) चरकानुसार क्षीरत्रय होता है।

(क) अर्क, स्नुही, वट (ख) अर्क, स्नुही, अश्मन्तक (ग) अर्क, वट, अश्मन्तक (घ) उपर्युक्त कोई नहीं

(139) ‘अर्कक्षीर’का प्रयोग किसमें निर्दिष्टहै।

(क) वमन में (ख) विरेचन में (ग) वमन, विरेचन दोनो में (घ) उपर्युक्त कोई नहीं

(140) चरकानुसार अश्मन्तक का प्रयोग किसमें निर्दिष्टहै।

(क) वमन में (ख) विरेचन में (ग) वमन, विरेचन दोनो में (घ) उपर्युक्त कोई नहीं

(141)चरक ने तिल्वक का प्रयोग बतलाया है।

(क) वमन में (ख) विरेचन में (ग) वमन, विरेचन दोनो में (घ) उपर्युक्त कोई नहीं

(142) चरकानुसार 'परिसर्प, शोथ, अर्श, दद्रु, विद्रधि, गण्ड, कुष्ठ और अलजी'में शोधन के लिए प्रयुक्त होता है।

(क) पूतीक (ख) कृष्णगंधा (ग) तिल्वक (घ) उपर्युक्त सभी

(143) ‘योगविन्नारूपज्ञस्तासां ..... उच्यते।

(क) श्रेष्ठतम भिषक (ख) तत्वविद (ग) छदम्चर वैद्य (घ) भिषक

(144) पुरूषं पुरूषं वीक्ष्य स ज्ञेयो भिषगुत्तमः। - किसका कथन हैं।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) हारीत

(145) यथा विषं यथा शस्त्रं यथाग्निरशर्नियथा। - किसका कथन हैं।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) भाव प्रकाश

(146) चरकानुसार ‘भिषगुत्तम’ है।

(क) तस्मात् शास्त्रऽर्थ विज्ञाने प्रवृतौ कर्मदर्शने। (ख) हेतो लिंगे प्रशमने रोगाणाम् अपुनर्भवे। (ग) विद्या वितर्की विज्ञानं स्मृतिः तत्परता क्रिया। (घ) योगमासां तु यो विद्यात् देशकालोपपादितम्।

(147) ताम्र का प्रथम उल्लेख किसने किया हैं।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) सोढल (घ) नागार्जुन

(148) 'पुत्रवेदवैनं पालयेत आतुरं भिषक्।' - किसका कथन हैं।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) काश्यप

(149) चरक संहिता मे अन्तः परिमार्जन द्रव्यों से सम्बधित अध्याय है।

(क) दीर्घ×जीवतीय (ख) अपामार्गतण्डुलीय (ग) आरग्वधीय (घ) षडविरेचनशताश्रितीय

(150) शिरोविरेचनार्थ ‘अपामार्ग’ का प्रयोज्यांग है ?

(क) तण्डुल (ख) बीज (ग) फल (घ) फल रज चूर्ण

(151) ‘वचा एवंज्योतिष्मति’दानों द्रव्यों को शिरोविरेचनद्रव्यों के गण में कौनसे आचार्य ने शामिल किया है।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) वाग्भट्ट (घ) अ, ब दोनों

(152) शिरोविरेचन द्रव्यों में कौनसा रस शामिल नहीं होता है।

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) लवण (घ) अ, ब दोनों

(153) चरक ने अपामार्गतण्डुलीय अध्याय में ‘वचा’ को कौनसे वर्ग में शामिल किया है।

(क) शिरोविरेचन (ख) वमन (ग) विरेचन (घ) आस्थापन/अनुवासन

(154) चरक ने अपामार्गतण्डुलीय अध्याय में ‘एरण्ड’को कौनसे वर्ग में शामिल किया है।

(क) शिरोविरेचन (ख) वमन (ग) विरेचन (घ) आस्थापन/अनुवासन

(155) चरक संहिता में सर्वप्रथम ’पंचकर्म’ शब्द कौनसे अध्याय मेंआया है।

(क) दीर्घन्जीवतीय (ख) अपामार्गतण्डुलीय (ग) आरग्वधीय (घ) षडविरेचनशताश्रितीय

(156) चरकानुसार औषध की सम्यक् योजनाकिस पर निर्भर करती है ?

(क) औषध की मात्रा और काल पर (ख) रोगी के बल और कालपर (ग) रोगी के कोष्ठऔर अग्निबल पर (घ) रोगी के वय और कालपर

(157) .....यवाग्वः परिकीर्तिताः।

(क) अष्टादश (ख) षड् (ग) चर्तुविंशति (घ) अष्टाविंशति

(158) चरकोक्त 28 यवागू में कुल कितनी पेया हैं।

(क) 4 (ख) 6 (ग) 32 (घ) 28

(159) किसके क्वाथ से सिद्ध यवागू विषनाशक होतीहैं।

(क) शिरीष (ख) सिन्धुवार (ग) सोमराजी (घ) विडंग

(160) यवानां यमके पिप्पल्यामलकैः श्रृता। - यवागू का कर्महै।

(क) कण्ठरोगनाशक (ख) वातानुलोमक (ग) पक्वाशयशूल रूजापहा (घ)रूक्षणार्थ

(161) यमके मदिरा सिद्धा .....यवागू।

(क) कण्ठरोगनाशक (ख) वातानुलोमक (ग) पक्वाशयशूल रूजापहा (घ) रूक्षणार्थ

(162) दधित्थबिल्वचांगेरीतक्रदाडिमा साधिता।- यवागू है।

(क) दीपनीय, शूलघ्नयवागू (ख) आमातिसारघ्नी पेया (ग) रक्तातिसारनाशक पेया (घ) पाचनी, ग्राहिणी पेया

(163) तक्रसिद्धा यवागूः।

(क) घृतव्यापद नाशक (ख) तैलव्यापद नाशक (ग) मद्यव्यापद नाशक (घ) क्षुधानाशक

(164) तक्रपिण्याक साधिता यवागू।

(क) घृतव्यापद नाशक (ख) तैलव्यापद नाशक (ग) मद्यव्यापद नाशक (घ) क्षुधानाशक

(165) ताम्रचूडरसे सिद्धा .....।

(क) शिश्नपीडाशामकः (ख) शुक्रमार्गरूजापहा (ग) रेतोमार्गरूजापहा (घ) उपर्युक्त सभी

(166) दशमूल क्वाथ से सिद्ध यवागू होतीहैं ?

(क) श्वासनाशक (ख) कासनाशक (ग) हिक्कानाशक (घ) उपर्युक्तसभी

(167) चरकानुसार मुर्गे का पर्याय है।

(क) ताम्रचूड (ख) चरणायुधा (ग) कुक्कुट (घ) उपर्युक्तसभी

(168) उपोदिकादधिभ्यां तु सिद्धा.....यवागू।

(क) विषमज्वरनाशक (ख) मदविनाशिनी (ग) भेदनी (घ) रोचक

(169) चरकानुसार चिकित्सक की अर्हताएॅमें शामिल नहीं है।

(क) हेतुज्ञ (ख) व्यवसायी (ग) युक्तिज्ञ (घ) जितेन्द्रय

(170) चरक संहिता मे बर्हिपरिमार्जन द्रव्यों से सम्बधित अध्याय है।

(क) दीर्घ×जीवतीय (ख) अपामार्गतण्डुलीय (ग) आरग्वधीय (घ) षडविरेचनशताश्रितीय

(171) चरकोक्त आरग्वधीय अघ्याय में कुष्ठहर कुल कितने ’लेप’ बताए गए है।

(क) 32 (ख) 15 (ग) 6 (घ) 16

(172) चरकोक्त आरग्वधीय अघ्याय में वातविकारनाशककुल कितने ’लेप’ बताए गए है।

(क) 5 (ख) 6 (ग) 7 (घ) 4

(173) चरकोक्त आरग्वधीय अघ्याय में कितने ’प्रघर्ष’ बताए गए है।

(क) 32 (ख) 4 (ग) 1 (घ) शून्य

(174) नतोत्पलं चन्दनकुष्ठयुक्तं शिरोरूजायां सघृतं प्रदेहः।

(क) विषघ्न (ख) शिरोरूजायां (ग) स्वेदहर (घ) कुष्ठहर

(175) शिरीष और सिन्धुवार के लेप होता हैं ?

(क) विषघ्न (ख) शरीरदौर्गन्ध्यहर (ग) स्वेदहर (घ) कुष्ठहर

(176) तेजपत्र, सुगन्धबाला, लोध्र, अभय और चन्दन के लेप का प्रयोग किस संदर्भ में हैं ?

(क) विषघ्न (ख) शरीरदौर्गन्ध्यहर (ग) स्वेदहर (घ) कुष्ठहर

(177) चक्रपाणि के अनुसार ‘अभय’ किस औषध का पर्याय हैं ?

(क) हरीतकी (ख) उशीर (ग) तगर (घ) देवदारू

(178) चरकसंहिता में प्रलेप की मोटाई और उसे लगाने के निर्देशों का वर्णन कौनसे अध्याय में है।

(क) अपामार्गतण्डुलीय (ख) आरग्वधीय (ग)विसर्पचिकित्सा (घ) वातरक्तचिकित्सा

(179) चरकोक्त आरग्वधीय अघ्याय में कुल कितने सूत्र है।

(क) 30 (ख) 32 (ग) 34 (घ) 36

(180) चरक ने विरेचन द्रव्यों के कितने आश्रय बतलाए है।

(क) 5 (ख) 6 (ग) 7 (घ) 8

(181) चरक ने शिरो विरेचन द्रव्यों के कितने आश्रय बतलाए है।

(क) 5 (ख) 6 (ग) 7 (घ) 8

(182) सप्तला-शंखिनी के विरेचन योगों की संख्या हैं।

(क) 45 (ख) 48 (ग) 39 (घ) 60

(183) धामार्गव के वामकयोगों की संख्या हैं।

(क) 45 (ख) 48 (ग) 39 (घ) 60

(184) दन्ती-द्रवन्ती के विरेचन योगों की संख्या हैं।

(क) 45 (ख) 48 (ग) 39 (घ) 60

(185) स्वरसः, कल्कः, श्रृतः, शीतः फाण्टः कषायश्चेति। .....।

(क) पूर्व पूर्व बलाधिका (ख) यथोक्तरं ते लघवः प्रदिष्टा (ग) तेषां यथापूर्व बलाधिक्यम् (घ) कोई नहीं

(186) ‘पंचविध कषाय कल्पनाओं’ के संदर्भ में ‘पंचधैवं कषायाणां पूर्व पूर्व बलाधिका’ किस आचार्य ने कहा है।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) वाग्भट्ट (घ) शारंर्ग्धर

(187) 'द्रव्यादापोत्थितात्तोये तत्पुनर्निशि संस्थितात्'- किस कषाय कल्पना के लिये कहा गया है।

(क) क्वाथ (ख) कल्क (ग) शीत (घ) फाण्ट

(188) ‘यः पिण्डो रसपिष्टानां स कल्कः परिकार्तितः’ किस आचार्य का कथन है।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) चक्रपाणि (घ) शारंर्ग्धर

(189) चरकमत से कषाय कल्पनाओं का प्रयोग किस परनिर्भर करता है ?

(क) व्याधि के बल पर (ख) आतुर के बल पर (ग) व्याधि एवं आतुर के बल पर (घ) कोई नहीं

(190) चरकके पंचाशन्महाकषाय में स्थापन महाकषायों की संख्या है।

(क) 3 (ख) 5 (ग) 6 (घ) 7

(191) चरकके पंचाशन्महाकषाय में निग्रहण महाकषायों की संख्या है।

(क) 3 (ख) 5 (ग) 6 (घ) 7

(192) चरकोक्त पचास महाकषायों में सबसें अधिक 11 बार सम्मिलित द्रव्य है।

(क) मुलेठी (ख) आरग्वध (ग) मोचरस (घ) पिप्पली

(193) चरकोक्त पचास महाकषायों में सम्मिलित कुल द्रव्यों की संख्या है।

(क) 50 (ख) 500 (ग) 276 (घ) 352

(194) चरक संहिता में महाकषाय का वर्ण किस स्वरूप में हैं।

(क) लक्षण व उदाहरण (ख) कर्म और उदाहरण (ग) कर्म और लक्षण (घ) उपर्युक्तकोई नहीं

(195) चरकोक्त जीवनीय महाकषाय में अष्टवर्ग के कितने द्रव्य शामिल है।

(क) 8 (ख) 5 (ग) 6 (घ) 7

(196) ‘भारद्वाजी’ किसका पर्यायहै।

(क) सारिवा (ख) वनकपास (ग) मंजिष्ठा (घ) धातकी

(197) चरकने निम्न किस महाकषाय का वर्णन नहीं किया है।

(क) दीपनीय (ख) पाचनीय (ग) कण्ठय (घ) संज्ञास्थापक

(198) चक्रपाणि के अनुसार ‘सदापुष्पी’ किसका पर्यायहै।

(क) कमल (ख) कुमुद (ग) आरग्वध (घ) अर्क

(199) चरक ने अर्जुन का प्रयोग किस महाकषाय में वर्णित किया है।

(क) हृद्य (ख) शूल प्रशमन (ग) मूत्र संग्रहणीय (घ) उदर्द प्रशमन

(200) चरकोक्त ज्वरहर दशेमानि के मध्य में किसको ग्रहण नहीं किया है।

(क) सारिवा (ख) मंजिष्ठा (ग)मुस्ता (घ) पाठा

(201) ‘आम्रास्थि’का वर्णन चरकोक्त किस दशेमानि वर्ग में है।

(क) पुरीषसंग्रहणीय (ख) हृद्य (ग) पुरीषविरंजनीय (घ) उपर्युक्त कोई नहीं

(202) कमल के भेदों का वर्णन चरकोक्त किस दशेमानि वर्ग में है।

(क) मूत्रसंग्रहणीय (ख) मूत्रविरेचनीय (ग) मूत्रविरंजनीय (घ) उपर्युक्त कोई नही

(203) मूत्रविरेचनीय महाकषाय में किसका उल्लेख नहीं है।

(क) दर्भ का (ख) कुश का (ग) काशका (घ) शर का

(204) ‘भृष्टमृत्तिका’का वर्णन चरकोक्त किस दशेमानि वर्ग में है।

(क) मूत्रसंग्रहणीय (ख) मूत्रविरेचनीय (ग) पुरीषविरंजनीय (घ) पुरीषसंग्रहणीय

(205) ’स्तन्यशोधन महाकषाय’ में सम्मिलित नहीं है।

(क) कटुकी (ख) नागरमोथा (ग) हरिद्रा (घ) मूर्वा

(206) ’प्रजास्थापन महाकषाय’ में सम्मिलित नहीं है।

(क) अमोघा (ख) अव्यथा (ग) अरिष्टा (घ) अश्वगंधा

(207) निम्नलिखित में से किस चरकोक्त दशेमानि में ‘मोचरस’ शामिल नहीं हैं।

(क) पुरीष संग्रहणीय (ख) वेदनास्थापन (ग) शोणितस्थापन (घ) पुरीषविरंजनीय

(208) निम्नलिखित में से किस चरकोक्त दशेमानि में ‘शर्करा’ शामिल हैं।

(क) दाहप्रशमन (ख) वेदनास्थापन (ग) शोणितस्थापन (घ) ज्वरघ्न

(209) दशमूल के द्रव्यों का वर्णन चरकोक्त किस दशेमानि वर्ग में है।

(क) वातहर (ख) बल्य (ग) शोथहर (घ) उर्पयुक्त कोई नहीं

(210) अशोकका वर्णन चरकोक्त किस दशेमानि वर्ग में है।

(क) वेदनास्थापन (ख) शोणितस्थापन (ग) वयःस्थापन (घ) शूलप्रशमन

(211) तृष्णानिग्रहण एंव वयः स्थापन महाकषायों में समाविष्टहै।

(क) अभया (ख) अमृता (ग) नागर (घ) पुनर्नवा

(212) चरकोक्त कुष्ठघ्न व कण्डूघ्न दोनों महाकषाय में समाविष्टहै।

(क) हरिद्रा (ख) खदिर (ग) आरग्वध (घ) विडंग

(213) चरकोक्त कुष्ठघ्न व कृमिघ्न दोनों महाकषाय में समाविष्टहै।

(क) हरिद्रा (ख) खदिर (ग) आरग्वध (घ) विडंग

(214) बेर के भेदों का वर्णन किस महाकषाय में है।

(क) वमनोपग (ख) विरेचनोपग (ग) स्नेहोपग (घ) स्वेदनोपग

(215) चरक संहिता में वर्णित 'पुरीष संग्रहणीय' महाकषाय के द्रव्य है।

(क) आम संग्राहक (ग्राही) (ख) पक्व संग्राहक (स्तम्भन) (ग) दोनों (घ) उपर्युक्त कोई नहीं

(216) चरक संहिता में वर्णित कौनसे महाकषाय को योगीनाथसेन ने 'अरोचकहर' कहा हैं।

(क) दीपनीय (ख) पाचनीय (ग) कण्ठय (घ) तृप्तिघ्न

(217) कालमेह, नीलमेह एवं हारिद्रमेह कीचिकित्सा मेंचरकोक्त किस दशेमानि वर्ग के द्रव्यों करना चाहिए।

(क) मूत्रसंग्रहणीय (ख) मूत्रविरेचनीय (ग) मूत्रविरंजनीय (घ) उपयुर्क्त कोई नहीं

(218) ‘विदारीगंधा’ किसका पर्याय हैं ?

(क) क्षीरविदारी (ख) विदारी (ग) शालपर्णी (घ) पृश्निपर्णी

(219) रसा लवणवर्ज्याश्च कषाया इति संज्ञिताः’ - किस आचार्य का कथन है।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) चक्रपाणि (घ) शारंर्ग्धर

(220) ’भिषग्वर’का वर्णन चरक संहिता के किस अध्याय में है।

(क) दीर्घन्जीवितीय (ख) खुड्डाक चतुष्पाद (ग) षड्विरचेनशताश्रितीय (घ) महारोगाध्याय

(221) चरक के मत से लघु द्रव्यों में किसकी की बहुलता रहती है।

(क) वाय्वग्निगुण बहुल (ख) आकाशवाय्वग्निगुण बहुल (ग) पृथ्वीसोमगुण बहुल (घ) उपरोक्त सभी

(222) चरक के मत से गुरू द्रव्यों में किसकी की बहुलता रहती है।

(क) वाय्वग्निगुण बहुल (ख) आकाशवाय्वग्निगुण बहुल (ग) पृथ्वीसोमगुण बहुल (घ) कोई नहीं

(223) ‘बलवर्णसुखायुषा’ किससे प्राप्त होता है।

(क) शुद्ध रूधिर (ख) ओज (ग) मात्रापूर्वक आहार (घ) अ, स दोनों

(224) निरन्तर वर्जनीय आहार द्रव्य है।

(क) मत्स्य (ख) दही (ग) माष (घ) उपरोक्त सभी

(225) ’वल्लूर’ शब्द का चक्रपाणिकृत अर्थ हैं ?

(क) शुष्क फलम् (ख) शुष्क मांसम् (ग) शुष्क शाकम् (घ) शुष्क कन्दम्

(226) न शीलयेत्आहार द्रव्य है।

(क) सैंधव लवण (ख) यव (ग) यवक (घ) जांगल मांस

(227) निरन्तर अभ्यसेत्द्रव्य नहीं है।

(क) दूध (ख) दही (ग) घृत (घ) मधु

(228) ‘नित्य तर्पणीय है।

(क) शालि (ख) मुद्ग (ग) सर्पि (घ) उपरोक्त सभी

(229) चरक संहिता के किस अघ्याय में ‘स्वस्थवृत्त’का वर्णन किया गया है।

(क) मात्राशितीय (ख) तस्याशितीय (ग) इन्द्रियोपक्रमणीय (घ) न वेगान्धारणीय

(230) चरक संहिता के किस अघ्याय में ’सद्वृत्त’ का वर्णन किया गया है।

(क) चू.सू.अ.5 (ख) चू.सू.अ.6 (ग) चू.सू.अ.7 (घ) चू.सू.अ.8

(231) चरकानुसार नित्य प्रयोज्य अंजन कौनसा है ?

(क) सौवीराजंन (ख) स्रोत्रोजंन (ग) रसाजंन (घ) पुष्पाजंन

(232) नेत्र से स्राव निकालने के लिए कौनसे अंजन का प्रयोग करना चाहिए।

(क) सौवीराजंन (ख) स्रोत्रोजंन (ग) रसाजंन (घ) पुष्पाजंन

(233) चरक ने नेत्र विस्राणार्थ रसांजन का प्रयोग बतलाया है।

(क) 5 वें या 8 वें दिन (ख) 3वें दिन (ग) 7वें दिन (घ) 5वेंया 8वें रात्रि में

(233) चरक ने नेत्र विस्राणार्थ रसांजन का प्रयोग कब बतलाया है।

(क) पन्चरात्रे अष्टरात्रे (ख) त्रिरात्रे (ग) सप्तरात्रे (घ) एकान्तरेरात्रे

(234) चक्षुस्तेजोमयं तस्य विशेषाच्छ्लेष्मतो भयम्। ततः ..... कर्म हितं दृष्टेः प्रसादनम्।। (च.सू.5/16)

(क) वातहरं (ख) पित्तहरं (ग) श्लेष्महरं (घ) त्रिदोषहरं

(235) चरक ने प्रायोगिक धूमवर्ती की लम्बाई बतलायी है।

(क) 8 अंगुल (ख) 6अंगुल (ग) 10 अंगुल (घ) 12 अंगुल

(236) आचार्य चरक ने प्रायोगिक धूम्रपान के कितने काल बताए हैं।

(क) 8 (ख) 6 (ग) 10 (घ) 5

(237) चरकमतेन स्नैहिक धूम्रपान दिन में कितनी बार करना चाहिए हैं ?

(क) 8 (ख) 2 (ग) 1 (घ) 3-4

(238) चरकमतेन धू्रम्रनेत्र का अग्र छिद्र किसके सम होना चाहिए।

(क) कोलास्थ्यग्रप्रमाणितम् (ख) कोलमात्रछिद्रे (ग) हरेणुका प्रमाणितम् (घ) सर्पषमात्रछिद्रे

(239) 'हृत्कण्ठेन्द्रियसंशुद्धिः लघुत्वं शिरसः शमः'- किसका लक्षण है।

(क) सम्यक् वमन (ख) सम्यक् नस्य (ग) सम्यक् धूम्रपान (घ) सम्यक्निरूह

(240) 12 वर्ष से पूर्व और 80 वर्ष के बाद धूम्रपान निषेध किसने बतलाया है।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) चक्रपाणि (घ) शारंर्ग्धर

(241) चरक के मत से नस्य का प्रयोग किस ऋतु में करना चाहिए।

(क) प्रावृट, शरद और बंसत (ख) शिशिर, बसंत, ग्रीष्म (ग) बर्षा, शरद, हेमन्त (घ) उपरोक्त सभी

(242) नस्य औषधि का प्रभाव कौनसी मर्म पर होता हैं।

(क) शंख (ख) श्रृंगाटक (ग) मूर्धा (घ) फण

(243) नासा हि शिरसो द्वारं तेन तद्धयाप्य हन्ति तान्। - किस आचार्य का कथन हैं।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) वाग्भट्ट (घ) शारर्ग्धर

(244) चरकमतेन ‘अणुतैल’ की मात्रा कितनी होती है।

(क) 1 पल (ख) 1 कोल (ग) 1 कर्ष (घ) अर्द्ध पल

(245) चरकानुसार ‘अणुतैल’ की निर्माण प्रक्रिया मे तैल का कितनी बार पाक किया जाता हैं ?

(क) एक बार (ख) दश बार (ग) सौ बार (घ) हजार बार

(246) शारंर्ग्धरके अनुसार कितने वर्ष से पूर्व नस्य का निषेध है।

(क) 10बर्ष (ख) 12 बर्ष (ग) 7 बर्ष (घ) 8 बर्ष

(247) वाग्भट्ट ने दातुन की लम्बाई बतलायी है।

(क) 8 अंगुल (ख) 6अंगुल (ग) 10 अंगुल (घ) 12 अंगुल

(248) निहन्ति गन्धं वैरस्यं जिहृवादन्तास्यजं मलम्।- किसका गुणधर्म है।

(क) दन्तपवन (ख) जिहृवा निर्लेखन (ग) मुख संगन्धि द्रव्य (घ) गण्डूषकवलधारण

(249) ‘निम्ब’ वृक्ष की दन्तपवन (दातौन) का प्रयोग करने का उल्लेख किस आचार्य ने कियाहैं।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) उपरोक्त सभी

(250) ‘दन्तशोधन चूर्ण’ का वर्णन किस आचार्य ने कियाहैं।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) शारर्ग्धर

(251) वृद्ध वाग्भट्टानुसार दंत धावन के लिए कौन से द्रव्यों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

(क) पीलु, पीपल, पारिभद्र (ख) श्लेष्मातक, शिग्रु, शमी, शाल्मली, शण (ग) तिल्वक, तिन्दुक, बिल्ब, विभीतक, र्निगुण्डी (घ) उर्पयुक्त सभी

(252) अष्टांग संग्रह के अनुसार निषिद्ध दन्तवन है।

(क) धव (ख) अर्क (ग) वट (घ) अपामार्ग

(253) ‘दन्तदाढर्यकर’ है।

(क) बकुल (ख) तेजोवती (ग) पीलू (घ) उपरोक्त सभी

(254) सुश्रुतने जिहृवार्निलेखन की लम्बाई बतलायी है।

(क) 6अंगुल (ख) 8अंगुल (ग) 10 अंगुल (घ) 12 अंगुल

(255) चक्रपाणि के अनुसार ‘कटुक’ किसका पर्याय हैं ?

(क) कटुकी (ख) मरिच (ग) कटुरोहिणी (घ) लताकस्तूरी

(256) मुखशोष में संग्रहकार के अनुसार हितकर है।

(क) ताम्बूल (ख) जातीपत्री (ग) लताकस्तूरी (घ) कर्पूर

(257) दंतदार्ढयकर, दन्तहर्षनाशक, रूच्यकर एंव मुखवैरस्यनाशकहैं।

(क) दन्तधावन (ख) जिहृवा निर्लेखन (ग) मुखसंगन्धि द्रव्य (घ) गण्डूष कवल धारण

(258) मुख संचार्यते या तु मात्रा स .....स्मृतः।

(क) कवलः (ख) गण्डूषः (ग) कवलगण्डूषः (घ) मुखवैशद्यकरः

(259) शारंर्ग्धर के अनुसार जन्म से कितने वर्ष बाद गण्डूष कवल धारणकरना चाहिए।

(क) 5 बर्ष (ख) 6 बर्ष (ग) 7 बर्ष (घ) 8 बर्ष

(260) चरक के अनुसार ‘दृष्टिः प्रसादं’ है।

(क) पादाभ्यंग (ख) पादत्रधारण (ग) पादप्रक्षालन (घ) छत्रधारणम्

(261) ’चक्षुष्यम् स्पर्शनहितम्’ कहा गया है।

(क) अंजन को (ख) गण्डूष धारण (ग) पादाभ्यंग (घ) पादत्रधारण

(262) ’वृष्यं सौगन्धमायुष्यं काम्यं पुष्टिबलप्रदम्’ - किसके लिए कहा गया है।

(क) क्षौरकर्म (ख) स्वच्छ वस्त्र धारण (ग) गन्धमाल्य धारण (घ) स्नान

(263) श्रीमत्पारिषदं शस्तं निर्मलाम्बरधारणम्।- किसके लिएकहा गया है।

(क) क्षौरकर्म (ख) स्वच्छ वस्त्र धारण (ग) गन्धमाल्य धारण (घ) स्नान

(264) बल, वर्ण वर्धन करता है।

(क) रक्त (ख) ओज (ग) सत्व (घ) आहार

(265) चरक के मत से ‘आदान काल’में कौनसी ऋतुए शामिल होती है।

(क) प्रावृट, शरद और बंसत (ख) शिशिर, बसंत, ग्रीष्म (ग) बर्षा, शरद, हेमन्त (घ) हेमन्त, शरद, बसंत

(266) ‘विसर्ग काल’ कहलाताहै।

(क) आग्नेय काल (ख) उत्तरायण काल (ग) दक्षिणायन काल (घ) उपरोक्त कोई नहीं

(267) आदान काल में कौनसे गुण की वृद्धि होती है।

(क) उष्ण (ख) शीत (ग) रूक्ष (घ) स्निग्ध

(268) विसर्ग काल में कौनसे गुण की वृद्धि होती है।

(क) उष्ण (ख) शीत (ग) रूक्ष (घ) स्निग्ध

(269) ‘बसंत ऋतु’ में कौन से रस की उत्पत्ति होती हैं ?

(क) तिक्त (ख) कषाय (ग) कटु (घ) उपरोक्त सभी

(270) ‘हेमन्त ऋतु’ में कौन से रस की उत्पत्ति होती हैं ?

(क) मधुर (ख) अम्ल (ग) लवण (घ) उपरोक्त सभी

(271) 'मध्ये मध्यबलं त्वन्ते श्रेष्ठमग्रे विर्निर्दिशेत्' यहॉ चक्रपाणि अनुसार ‘अग्रे’ पद का उचित अर्थ है ? (च.सू.6/8)

(क) शिशिरे (ख) प्रधाने (ग) चैत्रे (घ) वर्षायाम्

(272) आचार्य चरक ने ऋतुचर्या का वर्णन कौनसी ऋतु से प्रारम्भ किया है।

(क) शिशिर (ख) प्रावृट् (ग) हेमन्त (घ) शरद

(273) किस आचार्य ने ‘हंसोदक’का वर्णन नहीं किया हैं।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) वाग्भट्ट (घ) भावप्रकाश

(274) ‘यमंदष्ट्रा काल’का वर्णन किस आचार्य ने किया हैं।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) वाग्भट्ट (घ) शांरर्ग्धर

(275) जेन्ताक स्वेदका प्रयोग किस ऋतु मे करना चाहिए।

(क) शिशिर (ख) बंसत (ग) हेमन्त (घ) शरद

(276)‘वर्जयेदन्नपानानि वातलानि लघूनि च’ - सूत्र किस ऋतु के लिये कहा गया है।

(क) शिशिर (ख) बंसत (ग) हेमन्त (घ) शरद

(277)‘वातलानि लघूनि च वर्जयेदन्नपानानि’ - सूत्र किस ऋतु के लिये कहा गया है।

(क) शरद ऋतु (ख) हेमन्त ऋतु (ग) शिशिर ऋतु (घ) बंसत ऋतु

(278)‘उष्ण गर्भगृह में निवास’ - किस ऋतु के लिये कहा गया है।

(क) शरद ऋतु (ख) हेमन्त ऋतु (ग) शिशिर ऋतु (घ) बंसत ऋतु

(279)‘निवात व उष्ण गृह में निवास’ - किस ऋतु के लिये कहा गया है।

(क) शरद ऋतु (ख) हेमन्त ऋतु (ग) शिशिर ऋतु (घ) बंसत ऋतु

(280)‘प्रवात (तीव्र वायु)’ का निषेध किस ऋतु के लिये कहा गया है।

(क) शरद ऋतु (ख) हेमन्त ऋतु (ग) शिशिर ऋतु (घ) बंसत ऋतु

(281)‘प्राग्वात (पूर्वीवायु)’ का निषेध किस ऋतु के लिये कहा गया है।

(क) शरद ऋतु (ख) हेमन्त ऋतु (ग) शिशिर ऋतु (घ) बंसत ऋतु

(282)‘औदक, आनूप, विलेशय एवं प्रसह मांस जाति के पशु-पक्षियों का मांस का सेवन किस ऋतु में करना चाहिए।

(क) शरद ऋतु (ख) हेमन्त ऋतु (ग) बर्षा ऋतु (घ) बंसत ऋतु

(283)चरक के मत से ‘शारभं, शाशक, ऐणमांस, लावक और कपिजंलम् के मांस का सेवन किस ऋतु में करना चाहिए।

(क) शरद ऋतु (ख) हेमन्त ऋतु (ग) बर्षा ऋतु (घ) बंसत ऋतु

(284)चरकानुसार ‘लाव, कपिन्जल, ऐण, उरभ्र, शरभ और शशक मांस के मांस का सेवन किस ऋतुमें करना चाहिए।

(क) शरद ऋतु (ख) हेमन्त ऋतु (ग) बर्षा ऋतु (घ) बंसत ऋतु

(285) ’जांगलैः मांसैर्भोज्या’ का निर्देश किस ऋतु में है।

(क) हेमंत ऋतु (ख) बंसत ऋतु (ग) वर्षा ऋतु (घ) ग्रीष्म ऋतु

(286) ’जांगलान्मृगपक्षिणः मांस’ कानिर्देश किस ऋतु में है।

(क) हेमंत ऋतु (ख) बंसत ऋतु (ग) वर्षा ऋतु (घ) ग्रीष्म ऋतु

(287) चरकानुसार शिशिर ऋतु में किस ऋतुतुल्य चर्या करनी चाहिए है -

(क) शरद (ख) हेमन्त (ग) ग्रीष्म (घ) बंसत

(288) शिशिर ऋतु मेंकौनसे रस वर्ज्य हैं ?

(क) कटु,तिक्त,कषाय (ख) मधुर, तिक्त,कषाय (ग) मधुर, अम्ल, लवण (घ) कटु, अम्ल, लवण

(289)‘गुर्वम्लस्निग्धमधुरं दिवास्वप्न च वर्जयेत्’ - सूत्र किस ऋतु के लिये कहा गया है।

(क) बर्षा (ख) बंसत (ग) हेमन्त (घ) शरद

(290)‘व्यायाममातपं चैव व्ययावं चात्र वर्जयेत्’ - सूत्र किस ऋतु के लिये कहा गया है।

(क) बर्षा (ख) बंसत (ग) हेमन्त (घ) शरद

(291) चरक के मत से ‘कवलग्रह तथा अंजन’का प्रयोग किस ऋतु मे करना चाहिए।

(क) बर्षा (ख) बंसत (ग) हेमन्त (घ) शरद

(292) मद्यमल्पं न वा पेयमथवा सुबहु उदकम्।- किस ऋतु के लिये कहा गया है।

(क) शरद (ख) हेमन्त (ग) ग्रीष्म (घ) बंसत

(293) सर्वदोष प्रकोपक ऋतु है।

(क) शिशिर (ख) बंसत (ग) वर्षा (घ) शरद

(294) ’प्रघर्षोद्वर्तन स्नानगन्धमाल्यपरो भवेत’ का निर्देश किस ऋतु में है।

(क) हेमंत ऋतु (ख) बंसत ऋतु (ग) वर्षा ऋतु (घ) ग्रीष्म ऋतु

(295) आदान दुर्बले देहे ..... भवति दुर्बलः। उपयुक्त विकल्प में रिक्त स्थान की पूर्ति करें। (च.सू.6/33)

(क)कफो (ख) वायु (ग) पक्ता (घ) पुरूषो

(296) वर्षा ऋतु में मधु का प्रयोग किस तरह करना चाहिए।

(क) पान में (ख) भोजन में (ग) संस्कार में (घ) उपरोक्त सभी

(297) चरकानुसार ‘दिवास्वप्न’ किस-किस ऋतु मे वर्जनीयहै।

(क) बसंत, बर्षा, शरद (ख) प्रावृट, शरद और बंसत (ग) बर्षा, शरद, हेमन्त (घ) हेमन्त, शरद, बसंत

(298) हंसोदक जल का किस ऋतु में तैयार होता हैं ?

(क) हेमंत ऋतु (ख) बर्षाऋतु (ग) शरदऋतु (घ) उपर्युक्त सभी में

(299)‘उपशेते यदौचित्यात् ..... तदुच्यते।’ - रिक्त स्थान की पूर्ति उपयुक्त विकल्प से करें। (च. सू.6/49)

(क) ओकः सात्म्यं (ख) सदा पथ्यम् (ग)नैवसात्म्यम् (घ) असात्म्यम्

(300) ओकः सात्म्यको ‘अभ्यास सात्म्य’ किस आचार्य ने कहा है।

(क) चक्रपाणि (ख) योगीन्द्रनाथ सेन (ग) गंगाधर रॉय (घ) उपर्युक्त कोई नहीं

(301) चरक के मत से अधारणीय वेगों की संख्या है ?

(क) 6 (ख) 11 (ग) 13 (घ) 14

(302) ’कास’ को अधारणीय वेग किसने माना है।

(क) सुश्रुत (ख) चरक (ग) वाग्भट्ट (घ) शांर्रग्धर

(303) वाग्भट्ट निम्न में से कौनसा अधारणीय वेग नहींमाना है।

(क) उद्गार (ख) क्षवथु (ग) कास (घ) श्रमः निश्वास

(304) ‘शिरोरूजा’ किसके वेगनिग्रह का लक्षण है।

(क) मूत्र (ख) पुरीष (ग) शुक्र (घ) उपर्युक्त सभी

(305) ‘पिण्डिकोद्वेष्टन’ किसके वेगावरोधका लक्षण है ?

(क) मूत्र (ख) पुरीष (ग) शुक्र (घ) श्रमःनिश्वास

(306) ‘हृद् व्यथा’ लक्षण किसमें मिलता है।

(क) शुक्र वेग निग्रह (ख) शुक्र व पुरीष वेग निग्रह (ग) शुक्र व पिपासा वेग निग्रह (घ) क्षुधा व पिपासा वेग निग्रह

(307) स्वेदन, अवगाहन, अभ्यंग का निर्देश किसकी चिकित्सा में है।

(क) मूत्रवेग निग्रह (ख) पुरीषवेग निग्रह (ग) शुक्रवेग निग्रह (घ) अधोवात वेग निग्रह

(308) चरकानुसार पुरीषवेगनिग्रह किसकी चिकित्सा का क्रमहै।

(क) स्वेदन, अवगाहन, अभ्यंग (ख) स्वेदन, अभ्यंग, अवगाहन (ग) अभ्यंग, अवगाहन, स्वेद (घ) अभ्यंग, अवगाहन

(309) अभ्यंग, अवगाहन का निर्देश किसकी चिकित्सा में है।

(क) मूत्रवेग निग्रह (ख) पुरीषवेग निग्रह (ग) शुक्रवेग निग्रह (घ) उपर्युक्त सभी

(310) आचार्य चरकानुसार मूत्रवेगनिग्रह की चिकित्सा में देय बस्तिहै।

(क) अनुवासन बस्ति (ख) निरूह बस्ति (ग) उत्तर बस्ति (घ) त्रिविध बस्ति

(311) चरक के मत से शुक्रवेगनिग्रह की चिकित्सा में देय बस्तिहै।

(क) अनुवासन बस्ति (ख) निरूह बस्ति (ग) उत्तर बस्ति (घ) त्रिविध बस्ति

(312) ‘प्रमाथि अन्नपान’का निर्देश किसकी चिकित्सा में है।

(क) मूत्रवेग निग्रह (ख) पुरीषवेग निग्रह (ग) छर्दि वेग निग्रह (घ) क्षवथु वेग निग्रह

(313) ‘रूक्षान्नपान’का निर्देश किसकी चिकित्सा में है।

(क) मूत्रवेग निग्रह (ख) पुरीषवेग निग्रह (ग) छर्दि वेग निग्रह (घ) क्षवथु वेग निग्रह

(314) ‘अवपीडक सर्पिपान’ का निर्देश किसकी चिकित्सा में है।

(क) मूत्रवेग निग्रह (ख) पुरीषवेग निग्रह (ग) छर्दि वेग निग्रह (घ) क्षवथु वेग निग्रह

(315) चरकानुसार किस वेगरोधजन्य व्याधि में ‘भोजनोत्तर घृतपान’ करतेहै।

(क) क्षवथु (ख) उदगार (ग) पिपासा (घ) क्षुधा

(316) ‘विण्मूत्रवातसंग’ किसके वेगनिग्रह का लक्षण है।

(क) मूत्र (ख) पुरीष (ग) शुक्र (घ) अधोवात

(317) ‘विनाम’ किसके वेगनिग्रह का लक्षण है।

(क) मूत्र (ख) पुरीष (ग) क्षवथु (घ) मूत्र एवंजृम्भा

(318) ’शिरोरोग’ किसके वेगनिग्रह का लक्षण है।

(क) मूत्र (ख) निद्रा (ग) क्षवथु (घ) पुरीष, क्षवथु

(319) ’हृद्रोग’ किसके वेगनिग्रह का लक्षण है।

(क) वाष्प (ख) निद्रा (ग) क्षवथु (घ) जृम्भा

(320) ’अर्दित’ किसके वेगनिग्रह का लक्षण है।

(क) छर्दि (ख) निद्रा (ग) क्षवथु (घ) उदगार

(321) ’कुष्ठ, विसर्प’ किसके वेगनिग्रह का लक्षण है।

(क) छर्दि (ख) निद्रा (ग) क्षवथु (घ) उदगार

(322) ’बाधिर्य’ किसके वेगनिग्रह का लक्षण है।

(क) क्षुधा (ख) पिपासा (ग) निद्रा (घ) श्रमः निश्वास

(323) ’भ्रम’ किसके वेगनिग्रह का लक्षण है।

(क) क्षुधा (ख) बाष्प (ग) निद्रा (घ) अ, ब दोनों

(324) ’मद्य/मदिरा पान’ किसकी चिकित्सा में है।

(क) वाष्पवेगधारण (ख) निद्रावेग धारण (ग) शुक्रवेग धारण (घ) अ, स दोनो में

(325) ‘भुक्त्वा प्रच्छर्दनं’ का निर्देश किसके वेगनिग्रह की चिकित्सा में है।

(क) छर्दि (ख) निद्रा (ग) क्षवथु (घ)उदगार

(326) ‘रक्तमोक्षण’ का निर्देश किसके वेगनिग्रह की चिकित्सा में है।

(क) छर्दि (ख) निद्रा (ग) क्षवथु (घ)उदगार

(327) ’चरणायुधा’ किसका पर्यायहै।

(क) कुक्कुट (ख) मयूर (ग) काक (घ) कबूतर

(328) जृम्भा वेगधारण मे कौनसी चिकित्सा की जाती है।

(क) वातघ्न (ख) वातपित्तघ्न (ग) कफपित्तघ्न (घ) त्रिदोषघ्न

(329) ‘वातघ्न’किसके वेगनिग्रह की चिकित्सा में है।

(क) क्षवथु (ख) जृम्भा (ग) श्रमः निश्वास (घ) उपर्युक्त सभी

(330) ’वाणी’ के धारणीय वेगों की संख्या है।

(क) 4 (ख) 5 (ग) 6 (घ) 9

(331) ’मन’ के धारणीय वेगों की संख्या है।

(क) 4 (ख) 5 (ग) 6 (घ) 9

(332) ‘अभिध्या’ किसका धारणीय वेग है।

(क) मन (ख) वाणी (ग) शरीर (घ) उपर्युक्त को ई नहीं

(333) ‘स्तेय’ किसका धारणीय वेग है।

(क) मन (ख) वाणी (ग) शरीर (घ) उपर्युक्त को ई नहीं

(334) शरीरायासजननं कर्म व्यायाम उच्यते - किसका कथन है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) चक्रपाणि

(335) दिनचर्या के अन्तर्गत ‘व्यायाम’ का वर्णन किस ग्रन्थ में नही है।

(क) चरकसंहिता (ख) सुश्रुतसंहिता (ग) अष्टांग संग्रह (घ) अष्टांग हृदय

(336) चरक के अनुसार व्यायाम कब तक करना चाहिए।

(क) बलार्द्ध (ख) मात्रानुसार (ग) अर्द्धशक्ति (घ) मन्दशक्ति

(337) सुश्रुत के अनुसार व्यायाम कब तक करना चाहिए।

(क) बलार्द्ध (ख) मात्रानुसार (ग) अर्द्धशक्ति (घ) मन्दशक्ति

(338) व्यायाम करने से मेद का क्षय होता है - यह किस आचार्य ने कहा है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग) वाग्भट्ट (घ) चक्रपाणि

(339) चरकानुसार अतिव्यायाम से हो सकता है -

(क) प्रतमक श्वास (ख) वमन (ग) रक्तपिक्त (घ) उपर्युक्त सभी

(340) निम्न में से कौनसा एक लक्षण बलार्द्ध व्यायाम का नहीं है।

(क) मुखशोष (ख) ललाट प्रदेश में स्वेद (ग) कक्षा प्रदेश में स्वेद (घ) हृद्स्पन्दन में वृद्धि

(341) बुद्धिमान व्यक्ति को कौनसा कार्य अति मात्रा में नहीं करना चाहिए।

(क) व्यायाम (ख) ग्राम्यधर्म (ग) हास्य (घ) उपर्युक्त सभी

(342) 'वातलाद्याः सदातुराः' -किसका कथन है।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग)वाग्भट्ट (घ) काश्यप

(343) 'वातिकाद्याः सदाऽऽतुराः'- किसका कथनहै।

(क) चरक (ख) सुश्रुत (ग)वाग्भट्ट (घ) काश्यप

(344) आचार्य चरक ने बर्हिमुख स्रोत्रस को कहा है।

(क) मलायन (ख) मलायतन (ग) दोनों (घ) कोई नहीं

(345) चरकानुसार कफ का निर्हरण किस मास में करना चाहिए।

(क) चैत्र (ख) श्रावण (ग) अगहन (घ) पौष

(346) चरक मतानुसार पित्त का निर्हरण विरेचन द्वारा किस मास में करना चाहिए ?

(क) श्रावण मास (ख) चैत्र मास (ग) आषाढ मास (घ) मार्ग शीर्ष मास

(347) चरक संहिता में ‘देह प्रकृति’ का वर्णन किस अध्याय में हैं।

(क) न वेगान्धारणीयाध्याय (ख) रोगभिषग्जितीय विमानाध्याय (ग) महती गर्भावक्रान्ति (घ) उपरोक्त कोई नहीं

(348) चरक संहिता में ‘दोष प्रकृति’ का वर्णन किस अध्याय में हैं।

(क) न वेगान्धारणीयाध्याय (ख) रोगभिषग्जितीय विमानाध्याय (ग) महती गर्भावक्रान्ति (घ) उपरोक्त कोई नहीं

(349) चरक संहिता में ‘सत्व प्रकृति (मानस प्रकृति)’ का वर्णन किस स्थान में हैं।

(क) सूत्र स्थान (ख) विमान स्थान (ग) शारीर स्थान (घ) इन्द्रिय स्थान

(350) दधि किसके साथ खाना चाहिए।

(क) घृत (ख) शर्करा (ग) मधु (घ) उपरोक्त सभी




उत्तरमाला


1. क

21. ग

41. ख

61. क

81. ग

2. ग

22. क

42. क

62. घ

82. घ

3. घ

23. क

43. ग

63. ग

83. ग

4. घ

24. ग

44. क

64. घ

84. क

5. क

25. घ

45. ख

65. ख

85. ख

6. ग

26. क

46. घ

66. ग

86. ख

7. क

27. ख

47. क

67. घ

87. क

8. क

28. ग

48. ख

68. ग

88. ग

9. क

29. ख

49. ग

69. घ

89. घ

10. ग

30. क

50. ख

70. घ

90. ग

11. ग

31. घ

51. ग

71. ग

91. ख

12. क

32. ग

52. क

72. ग

92. क

13. ख

33. ग

53. क

73. क

93. ख

14. क

34. क

54. ख

74. ख

94. ग

15. ग

35. क

55. घ

75. ख

95. घ

16. क

36. क

56. ख

76. ग

96. घ

17. ग

37. घ

57. ख

77. ग

97. क

18. क

38. क

58. क

78. घ

98. घ

19. घ

39. घ

59. ग

79. क

99. ख

20. घ

40. क

60. घ

80. क

100. क

101. घ

121. ख

141. ख

161. ग

181. ग

102. क

122. ग

142. ख

162. घ

182. ग

103. घ

123. ग

143. ख

163. क

183. घ

104. क

124. घ

144. क

164. ख

184. ख

105. ग

125. ख

145. क

165. ग

185. ग

106. ख

126. क

146. घ

166. घ

186. ग

107. घ

127. ग

147. ख

167. घ

187. ग

108. ख

128. घ

148. ख

168. ख

188. ग

109. घ

129. ग

149. ख

169. ख

189. ग

110. क

130. ख

150. ख

170. ग

190. ख

111. क

131. घ

151. घ

171. ख

191. क

112. क

132. घ

152. घ

172. घ

192. क

113. क

133. ग

153. ग

173. ग

193. ग

114. घ

134. ग

154. घ

174. ख

194. क

115. ग

135. ग

155. ख

175. क

195. ग

116. ख

136. ख

156. क

176. ख

196. ख

117. क

137. घ

157. घ

177. ख

197. ख

118. घ

138. ख

158. ख

178. ग

198. घ

119. ग

139. ग

159. ग

179. क

199. घ

120. घ

140. क

160. क

180. ख

200. ग

201. क

221. क

241. क

261. घ

281. क

202. ग

222. ग

242. ख

262. ग

282. ख

203. घ

223. घ

243. ग

263. ख

283. घ

204. ग

224. घ

244. घ

264. घ

284. क

205. ग

225. ख

245. ख

265. ख

285. ग

206. घ

226. ग

246. ग

266. ग

286. घ

207. घ

227. ख

247. घ

267. ग

287. ख

208. ख

228. घ

248. क

268. घ

288. क

209. ग

229. क

249. ख

269. ख

289. ख

210. क

230. घ

250. ख

270. क

290. क

211. ख

231. क

251. घ

271. क

291. ख

212. ग

232. ग

252. क

272. ग

292. ग

213. घ

233. घ

253. क

273. क

293. ग

214. ख

234. ग

254. ग

274. घ

294. ग

215. ख

235. क

255. घ

275. ग

295. ग

216. घ

236. क

256. ग

276. ग

296. घ

217. ग

237. ग

257. घ

277. ग

297. क

218. ग

238. क

258. क

278. ख

298. ग

219. ख

239. ग

259. क

279. ग

299. क

220. ग

240. घ

260. क

280. ख

300. ग

301. ग

311. ख

321. क

331. क

341. ग

302. ग

312. ख

322. ख

332. क

342. क

303. क

313. ग

323. घ

333. ग

343. घ

304. क

314. क

324. घ

334. ख

344. क

305. ख

315. क

325. क

335. क

345. क

306. ग

316. घ

326. क

336. ख

346. घ

307. क

317. घ

327. क

337. क

347. क

308. ख

318. ख

328. क

338. ग

348. ख

309. ग

319. क

329. ख

339. घ

349. ग

310. घ

320. ग

330. ख

340. घ

350. घ


 

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